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होली की याद -421

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मैंने खेली होली तुम संग थी मैंने तुम संग.... पहले चरनन गुलाल लगाई ऊपर से फिर फूल बरसाई मुख पर चन्दन अबीर लगाई तुम तो ऐसे सज गये दाता जैसे सज गये हों रघुराई मैंने तुम संग..... हर होली मुझे याद है आती अंखियां अविरल अश्रु बहाती रह-रह कर तेरी याद दिलाती अब तो आ जाओ मेरे दाता तुम संग खेलुंगी फिर होली मैंने तुम संग......

होली गीत -420

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मन खेले मेरा होली "तुम संग" खेले मेरा मन होली मात-पिता के घर में आकर अपने ऊपर नित इठलाकर खेलूं सब संग होली मन खेले मेरा होली पिय घर से मैं निज घर आई खेल फाग ख़ूब धमाल मचाई भीतर से बाहर तक रंग गई खेली चहुं दिशि होली मन खेले मेरा होली "गुरु घर" मेरा जनम जनम से आवत जात रहि कबहु कबहु से जनिमन से हूं भटकत आई अब खेलूं गुरु संग होली मन खेले मेरा होली                            11/3/22