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दिले शायरी -64

---रूह से रूह कुछ इतनी बदल सी गई है,     कि "मैं" को मिटाकर वो "तू" हो गई है!! ---भटकता हूँ जब भी यूँ तुझसे बिछड़कर,     सबक याद आते हैं तब रह-रह के मुझको!! ---तेरा आसरा ही बचाता है मुझको,     तुझी ...

खुशियाँ-378

खुशियाँ तेरे इर्द-गिर्द हैं खुशियों को तू ढूँढा कर दिल में रखकर बात किसी की मन से मत तू रूठा कर छोड़ छाड़ कर मन के नाते सबसे फ़र्ज निभाया कर बाक़ी सब बेकार के फन्दे लौ उनसे ही ...

सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-47

"घायल की गति घायल जाने" ये कहावत सुनी तो बहुत थी लेकिन महसूस कभी नहीं की थी। इन दिनों में यह कहावत बहुत अनुभवों से हमें गुजार रही थी। जो लोग दिन रात खुशामदीद की तरह आगे-पीछे घूम...

गुरुगीता-80

एक बार समर्थ रामदासजी मिरज गाँव (महाराष्ट्र) पधारे | वहाँ उन्होंने किसी विधवा कन्या को तुलसी के वृंदावन (गमले) के पास कोई ग्रंथ पढ़ते देख पूछा : “कन्या! कौन-सा ग्रंथ पढ़ रही हो?” “...

दिले शायरी-63

---क्या भूलूँ क्या याद करूँ तुम्हारे जाने के बाद,     बरसों  पुरानी यादें आज ताजा हो चली हैं!! ---बुजुर्गों की दुआओं का असर ही तो था,     जिनकी दुआओं के दम पर बढ़े जा रहे थे हम !! ---सुना ह...

अति बैरागी-377

अति बैरागी मन किसी-किसी का जिसे श्मशान वैराग्य भी कहते हैं कभी-कभी ही हो पाता है जैसे खाते-खाते मिठाई मन ऊब जाता है और थोड़ा सा नमकीन खाने को जी चाहता है बस वही हाल इस मन का भी ...

अद्भुत आश्चर्यजनक किन्तु सत्य-11

मैं गुजरात प्रान्त के बलसाड़ जिले के डुंगरी ग्राम में रहता हूँ। सन् १९६२ से १९६५ तक स्थानीय हाई स्कूल में नॉन टीचिंग स्टाफ के रूप में कार्यरत रहा। इसी दौरान मेरा संपर्क पास ...

गुरुगीता-79

एक बार एक सत्संगी दरबार साहिब आ रहा था। लंगर के लिये कुछ रसद भी साथ उठा कर आ रहा था। यह गुरु अरजन देव जी के समय की बात है। गर्मी के दिन थे। अमृतसर शहर से थोड़ा पहले वह एक बृक्ष की छ...

सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-46

भक्त और भगवान की लड़ाई चालू थी और भगवान द्वारा ली जाने वाली परीक्षाएं भी चालू थीं, लेकिन इतना विश्वास ज़रूर था कि जो समय-समय पर भक्त की पुकार सुनकर दौड़े आये हैं वे हमारे लिय...