खुशियों के हर पल को जीना सबके बस की बात नहीं दुःख में भी जो ख़ुशी ढूँढ ले इससे अच्छी कोई बात नहीं बचपन से चलते चलते ही अन्तिम कगार पर पहुँचे हैं फ़िर भी जीवन के कुछ पन्नों पर क...
एक बार एक मित्र ने सर जान हर्शल नामक प्रख्यात पाश्चात्य विद्वान से प्रश्न किया, “आपको सृष्टि में सर्वोत्तम वस्तु कौन-सी लगी?” तो उन्होंने मुस्कराते हुए उत्तर दिया, “भाँति-...
हिमालय की पर्वतीय तपोभूमि में प्रवेश करते ही मन को स्वाभाविक शान्ति प्राप्त होती है। इस वर्ष मैं कुछ समय के लिये हरिद्वार ऋषिकेश गया। चित्त में बड़ी शान्ति प्राप्त हुई। ...
मैं सरकारी अंग्रेजी मिडिल स्कूल हटा (जिला सागर मध्य प्रदेश) में एक साधारण कर्मचारी हूँ। मुझे मेरे प्रिय मित्र गंगा प्रसाद जी स्वर्णकार वैद्य के चिरंजीव भगवान दास जी वैद्...
गुरु से तिरस्कार और प्रताड़ना भी मिलती है। बहुत बार वे द्वार पर शिष्य भाव से आए साधक को स्वीकार नहीं करते। जैसे द्रोणाचार्य ने एकलव्य को धनुर्विद्या सिखाने से मना कर दिया...
धीरे-धीरे समस्त बाड़ों में पूजा-पाठ का माहौल बनने लगा था। सभी की इच्छा होती थी कि हम लोग उनके पूजा के स्थान को देखें। एक दिन जब हम यज्ञ करा चुके तो एक भाई बोला दीदी जी मैंने अपन...
एक संन्यासी हुए हैं स्वामी निगमानंद। गृहस्थ जीवन से निवृत्त होने के बाद उन्होंने संन्यास लिया। आमतौर पर लोग घर-गृहस्थी छोड़कर संन्यास लेते हैं या पारिवारिक दायित्व सिर...