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जनवरी, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मोक्ष -418

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 मोक्ष नहीं ना मुक्ति चाहिये   तेरे चरणों में स्थान चाहिये   जब - जब तू धरती पर आये   मुझको तेरा साथ चाहिये  धूल बनूँ तेरे चरणों की  या फिर हार बनूं सीने का   जो भी हो जैसे भी हो बस  केवल तेरा प्यार चाहिये   मैं जैसा भी.. तेरा ही हूं  और किसी आस नहीं है   दिल भी धड़के तेरे लिये ही   छोटी हो पर प्यास यही है ।                        👣🙏

तुम हो-417

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तुम हो मन का संसार मेरा तुम ही तो मन की ख़ुशबू हो चाहे जितना मैं फिरता रहूं मन की दुनिया में तुम ही हो जब भी आते हो ख्यालों में बेवजह मुस्कुरा जाता हूं तुम इर्द-गिर्द ही हो मेरे ये सोच के ख़ुश हो जाता हूं तुम चाहे जितना दूर रहो मैं पास तुम्हें उतने पाता भीतर में तुम हो छुप जाते मैं इधर उधर ढूंढा करता तेरी यादों में खोया रहता तेरी ख़ुशबू को सूंघा करता !!                          👣🙏

शरणागत हूं-416

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शरणागत हूं शरणागत हूं मैं शरण में तेरी आया हूं औरों की मुझको ख़बर नहीं बस अपना आपा खोया हूं मुझे होश में मत आने देना वरना मैं फ़िर से भटकुंगा कठपुतली तेरी बना रहूं तो फ़िर न कहीं मैं जाऊंगा तुम नाच नचाओगे मुझको मैं ख़ुश होकर के नाचुंगा मेरी डोर है तेरे हाथों में ये सोच के मैं इठलाऊंगा बस गीत तेरे ही गाऊंगा ऐसे ही तुझे रिझाऊंगा !!                   👣🙏

तुम मेरे हो-415

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तुम मेरे हो-415 ========== कैसे न कहूं तुम मेरे हो तुम ही तो केवल मेरे हो संसार में सब कुछ बेगाना मेरे अपने तो तुम ही हो कुछ लोग कहें क्या पाया है ? मैंने पाया ही पाया है.... संसारी रिश्तों से ऊपर तुमको ही मैंने पाया है सजदा करता हूं चरणों में जिनमें आकर विश्राम मिला इस दौड़-धूप की दुनियां को बस छोड़ यहां आराम मिला मैं तेरा हूं...तेरा ही हूं तुम ही तो केवल मेरे हो मेरा हाथ यूं ही पकड़े रहना चलते रहना मुझको लेकर     चलते रहना मुझको लेकर !!                        👣🙏