बहुत समय पहले की बात है, किसी नगर में एक बेहद प्रभावशाली महंत रहते थे । उन के पास शिक्षा लेने हेतु कई शिष्य आते थे। एक दिन एक शिष्य ने महंत से सवाल किया, स्वामीजी आपके गुरु कौन ह...
---तुमने तो झट से कह दिया,रहता हूँ तेरे भीतर, वो ऑखें कहॉ से लाऊँ,जो देख सके भीतर तुमको!! ---शब्दों की माला नहीं है पिरोने लायक, भावनाओं का हार पहनाता हूँ, घुटन सी होने लगती ...
शरण में तेरी रहने पर ही फ़ौलादी मैं बन पाया हूँ जग ने जब-जब तोड़ना चाहा उतना ही जुड़ता आया हूँ तेरी ताकत - तेरी हस्ती हरदम साथ ही रहती है बाजू में कोई बस ना पाया शमशानों की बस्त...
गुरुदेव ने मन्दिर में सहायता करने का स्वप्न जिन भाई को दिया था, वे तो घर चले गये लेकिन हम ये सोचने पर मजबूर हो गये कि गुरुदेव को बराबर ख़याल है बेशक वे हमें दिखते न हों। उनकी दी ...
बचपन से ही मैं बागवानी का शौकीन रहा हूँ। जब मैं नौकरी पेशा में था, तो मैंने अपने छोटे से आवास को तरह- तरह के फूलों और पौधों से सजा रखा था। व्यस्तताओं से भरे जीवन में भी मैं उन पौध...
एक समय एक व्यक्ति ने आनन्दमयी माँ के समक्ष मन्त्र दीक्षा प्रदान करने हेतु प्रार्थना की। माँ ने उन्हें दीक्षा के पूर्व भगवन्नाम का सुनिश्चित संख्या में लिखने का आदेश दिय...
---दोनों हाथों को फैलाकर जब मॉगता हूँ दुआ तुमसे, सोचता हूँ बराबर कि क्या कुछ नहीं दिया तुमने!! ---तुम्हारे दर पर सज़दा करने का ढंग भी निराला है, झुकता हूँ चरणों में जब तेरे...
धीरे-धीरे मन्दिर का ढॉचा खड़ा हो गया। अब बारी थी मूर्ति की व्यवस्था करने की। जिन जानकारों ने वादा किया था, वे भी अपने वादे से मुकर गए, अब क्या करें,समझ नहीं आ रहा था।तभी प्रेरण...
मन की खिड़की खोल रखी है अब तो आ जाओ गुरुवर दिल मेरा रहने के काबिल आकर बस जाओ गुरुवर भरी जवानी कुछ कर ना पाये याद तेरी दिल में ना लाये देख बुढ़ापा रोना आया तन तो सारा क्षीण हो गय...
🔵 एक बार मेरी धर्मपत्नी बहुत गम्भीर रूप से बीमार हो गईं। उन्हें दमा की बीमारी थी। हालत इतनी खराब थी कि पानी में हाथ डालना भी मुश्किल था। कोई भी काम अपने हाथ से नहीं कर पातीं। ...