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कर्म की गति

​कर्मों की गति का लेखा-जोखा  कौन पता कर पाता है तू जो चाहे बिगड़ी बना दे तू ही सबका दाता है -लोग कहें ये अच्छा-बुरा है सबको तू भरमाता है दिल की बातें घटनाक्रमों को तू ही सुनता समझता है - किस किस को हम देते सफाई जो हुआ अच्छा ही     हुआ कैसे एक घने बरगद का पत्ता पत्ता अलग हुआ -तुम चाहे जितना भी चाहो मर्जी तुम्हारी होती नहीं किस्मत के सब खेल निराले तू कब क्या दे दे पता नहीं

याद आपकी-428

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याद आपकी- बात आपकी  मुझको खूब सताती है रोकर हंसना- हंसकर रोना कुछ ऐसा हाल बनाती है तुम तो मुझको देखा करते मैं तो देख नहीं पाती किससे भेजूं- कहां मैं भेजूं तेरे लिए जो लिखी है पाती मेरे दाता समझो अब तो हुआ ये क्या है.. दिल का हाल मन को मेरे- "मनहर" मेरे फिर से कर दो मालामाल !!

कर्म -426

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कर्मों का लेखा-जोखा लेने सब आपस में मिलते हैं मात-पिता और बच्चे सारे कर्मों से ही सबको चुनते हैं हम कहते सब मेरा - मेरा कोई यहां ना मेरा होता जिसका क़र्ज़ है चुकना बाकी वो ही केवल साथ है होता रिश्ते - नाते प्यार के धागे पिछले कर्मों से आये हैं किसी से नफ़रत किसी पै गुस्सा ये भी सब कर्मों के साये हैं टूटे बंधन रोते हैं हम यही तो कर्मों की माया है मोह के बंधन तोड़ सकें तो कोई न अपना - पराया है सब उसकी ही माया है !!

दृष्टा-425

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दृष्टा बनकर देखो पहले  बुरे विचार मन में ना लाओ करता है सब करने वाला ईश्वर पर विश्वास जमाओ मैं-मैं अपनी दूर भगाकर  देखो उसके खेल निराले अच्छा-बुरा करने वालों के वे ही हैं सबके रखवाले कौन किसी को क्या दे सकता ? ईश्वर ही सब देने वाले  उम्मीद किसी से क्यों करना  जब कर ही दिया सब उनके हवाले सबको अच्छा सोचा कर तू सब ही अच्छे लगने लगेंगे तेरे दु:खों-तेरे कष्टों को केवल गुरुवर ही दूर करेंगे वे ही सारे कष्ट करेंगे !!

शुकराना -424

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शुकराना तेरा है प्रीतम तूने मुझको गले लगाया प्यार की छांव में मुझे बिठाकर तूने अमृत पान कराया छककर अमृत पीता रहा मैं प्याला खाली होता गया ना जाने बिन देखे कैसे तू भी प्याला भरता गया जब-जब मुझको लगता ऐसे रीता होता जाता है सब तब अनदेखे अनजाने ही सब औकात से ज़ियादा देता गया शुकराना... शुकराना प्रीतम प्रेम प्याला पिलाता गया मुझको अपना बनाता गया !!

कैसी प्रीत -423

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कैसी प्रीत की लगन लगी है कैसे तराने प्यार के गाऊं जाने अंजाने जब से मिला हूं तेरी ही छांव में पलता गया हूं क्या-क्या मन को याद दिलाऊं कैसे मैं शुकराना  गाऊं तू ही सब कुछ मेरा है बस सब कुछ मुझमें तू ही है कैसे प्यार को भूलूं तेरे प्रीतम मेरा तू ही है तेरे प्यार से गढ़ा गया मैं तुझको छोड़ कहां जाऊं दिल से दिल तक तार जुड़ा है तुझमें विलय-विलय हो जाऊं कैसे तराने प्यार के गाऊं कैसे मैं शुकराना गाऊं !!

अतीत- 422

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अतीत की यादों के सहारे.. वर्तमान में जीना सुकून भरा होता है तेरे साथ बिताये एक- एक पल को ख्वाबों में सजाना कितना सुखद होता  है..  तेरी बातें , तेरी यादें, तेरा मुस्कुराना और अचानक क्षितिज में कहीं खो जाना.. जैसे कल की ही बात हो..  तेरी यादों के सहारे जीवन का बढ़े जाना भी.. लबालब खुशबुओं से भरा होता है !!