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सितंबर, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

घर परिवार-395

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घर परिवार के साथी मेरे जाने अनजाने रिश्ते मेरे जो अब मेरे साथ नहीं हैं सशरीर अब पास नहीं हैं याद पुरानी जब आ जाती है मुझको बहुत रुला जाती है कैसे फ़िर से मिलन हो उनसे बहुत सी बातें कहूं मैं उनसे मुझसे जो भी भूलें हुईं हैं नादानी में ग़लतियां की हैं कैसे अब मिलकर मैं उनसे अब्बा हो फ़िर रूठूं उनसे अच्छे बुरे का खेल ये सारा याद मुझे आता है दोबारा बचपन से अब तक केअपने आ जायें एक बार वो मिलने उनको गले लगाकर रो लूं ग़लती हुई तो माफ़ी मांग लूं जब भी सब अपने याद आते हैं मुझको तो बहुत रुला जाते हैं!!                      @शशिसंजय

सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-11

अगले माह हम जेल के ड्रामा हॉल में पहुँचे तो सभी बन्दी भाई बहुत ही खुश दिख रहे थे।पूछने पर पता चला कि उन भाइयों में से एक भाई के घर से कई सालों बाद कोई मिलने आया था और वही नहीं, सभ...

सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-10

पुनः पूर्णिमा को जब पहुँचे तो ड्रामा हॉल में सभी भाई एकत्रित थे, न जाति-पॉति का कोई भेद, ना ही ऊँच-नीच की परवाह।सभी की ऑखें बाहर की ओर झॉक रही होती थीं। किसी एक ने भी अग़र देख लिय...

सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-9

लगातार  6 माह हो गये थे कारागार में जाते हुये कि अचानक महिला जेल से भी बुलावा आने लगा, इधर बालिका सदन, नारी निकेतन,और बालिका गृह में जहाँ हम सभी जा रहे थे ।वहां पर और बहनों  को भे...

सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-8

प्यार का प्रवाह उमड़े ही जा रहा था थमने का नाम नहीं । एक-एक कर जब सबके हाथों में राखी बँध गई, तो सबको मिठाई और नमकीन बॉटी गई, कुछ तो खुद न खाकर हम सबको थोड़ा सा खिलाने का प्रयास कर...

सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-7

राखी का त्यौहार विशेष होता था हम सभी के लिए।पहले त्यौहार पर हम लोग नहीं गये, उसके बाद रविवार को जब गये तो सभी बन्दी भाईयों ने रोष प्रकट किया।पूछने पर पता चला कि उन सभी ने राखी ...

सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-6

अनवरत कार्यक्रमों की श्रंखला में नवरात्रि साधना का समय भी आ गया, कितने लोगलघुअनुष्ठान(24000गायत्री मंत्र जप) करेंगे,सबको बिठाकर तय किया गया।ज्यादातर लोग घबराने लगे कि नौ दिन...

सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-5

उन्हीं शैतान ग्रुप में एक भाई था मंगला (परिवर्तित नाम) दोनों भाई आ गये थे जमीनी विवाद में । बहुत काम करता, सारी तैयारियां कराता, तरीके से सबको बैठाता, देखने में लगता कि कितना म...

सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-4

धीरे-धीरे रविवारीय कार्यक्रम चलता रहा, लगभग 1200 बन्दी भाई थे उस समय कारागार में । अधीक्षक महोदय ने सबको यज्ञ में शामिल रहने के लिए कह रखा था कोई भी बैरकों में नहीं रहना चाहिए । स...