मैं क्या हूँ ======= 🔴 इस चेतना में ले जाने का इतना ही अभिप्राय है कि 'अहम्' की सर्वोच्च भावना में जागकर तुम एक समुन्नत आत्मा बन जाओ और अपने उपकरणों का ठीक उपयोग करने लगो। जो पुराने, ...
साधक को दो बातें हमेशा याद रखनी चाहिये-लक्ष्य को भूलना नहीं और अत्यन्त आतुरता होने पर भी कभी उबना नहीं है। देर सहन नहीं होती हैं परन्तु देर होने के डर से साध्यको छोड़ देना ...
उम्र का पहिया बढ़ते ही पीछे की यादें आतीं हैं वो उछल कूद औ पेड़ पै झूले सब घुमड़-घुमड़ कर जाती हैं क्या निश्छल प्यारा बचपन था कभी रोता था कभी हँसता था ज़िद करने पर घर का हर बन्दा बेहद ही लाड़-लड़ाता था पल में रूठो पल में अब्बा हर पल का बचपन अच्छा था छल झूठ कपट की ख़बर नहीं नख से सिर तक वो सच्चा था कोई लौटा दो बचपन मेरा जो हर पल की याद दिलाता है जिम्मेदारी का कुछ भान नहीं ख़ुद की मस्ती में ही रहना था!! @शशिसंजय
एक और जुझारू बन्दी भाई का याद आता है नवरंग सिंह। लूट एवं मारने का प्रयास (Attempted to murder) में दस साल की सज़ा में था। पैरोल पर गया और वहीं से भाग गया,बाद में पकड़ा गया तथा दुबारा में सात साल क...
मेरी पत्नी को प्रायः पेट में दर्द बना रहता था। उस समय मैं बिहार में सरकारी नौकरी कर रहा था। घटना सन् 1990 की है।एक दिन अचानक पत्नी के पेट में दर्द उठा, दर्द इतना असहनीय था कि घर के ...
मैं क्या हूँ ====== 🔴 उच्च आध्यात्मिक मन से आई प्रेरणा भी इसी प्रकार अध्ययन की जा सकती है। इसलिए उन्हें भी अहम् से भिन्न माना जाएगा। आप शंका करेंगे कि उच्च आध्यात्मिक प्रेरणा क...
🔵 मंत्र दीक्षा मैंने सन् १९७२ में ही ले ली थी। अपने पैतृक गाँव खीर भोजना, वारसलीगंज, नवादा (बिहार) में ही वह संस्कार सम्पन्न हुआ था। १९७६ में बोकारो में गायत्री यज्ञ हुआ। आदर...
एक बार की बात है | बाबा सावन सिंह जी अपनी कार में जा रहे थे | तो कार के बाहर उनकी नज़र पड़ी एक कार पंचर हो गई थी ।और उस कार का परिवार लोगों से मदद मांग रहा था | बाबा सावन सिंह जी ने अपनी क...
---चारों तरफ़ "मैं" और "मेरी पहचान" की नुमाईश है, मैं को हटाकर हम करने की तनिक सी न गुंजाइश है!! ---तू मुझमें है मैं तुझमें हूँ ये फन्डा समझ नहीं आता, जब लड़ते हैं भाई-भाई, तब तू तो नज...