---तेरी ख़ुशबू तेरी रंगत तेरी मुस्कान समाई जाती है मुझमें भी, पूछता है जब भी कोई मेरी ख़ुशी का राज मुझसे!! ---लोग छुप-छुप के प्यार करते औ छुपाते हैं, मैंने ख़ुलकर तेरे प्...
बीत गए कितने दिन देखे कैसे गुजरे हैं ये साल लगता है तुम दूर नहीं हो अब भी हो तुम मेरे पास तरस रही हैं अंखियां मेरी देखत हैं ये चारों ओर रात गई सब पहर हैं बीते होने वाली है अब तो भोर दरश को प्यासा है मन मेरा बाट तिहारी जोहत है आ जाओ एक बार कन्हैया बांदी तुम्हारी रोबत है इतने निष्ठुर कभी नहीं थे बरसाया बस तुमने प्यार आज तमन्ना पूरी कर दो आ जाओ फ़िर से एक बार मत तरसाओ मेरे दाता आ जाओ बस आ जाओ एक बार तिरछी चितवन से देख इधर मुसका जाओ!! @शशिसंजय
गुरु ही मौला गुरु ही मुर्शिद गुरु ही खेवनहार है गुरु ही ब्रह्मा गुरु ही विष्णु गुरु ही पालनहार है मन की बातें गुरु ही जाने गुरु ही परवरदिगार है पीर फ़कीर वो सब कुछ मेरा गुरु ही जगदाधार है आगे पीछे ऊपर नीचे गुरु की ही तो छाया है पीढ़ी दर पीढ़ी का लेखा सब कुछ उसकी ही माया है जब से आया शरण में उसकी खुशियों का अम्बार है जो भी उससे जुड़ता जाता पाता बस वो प्यार है !! @शशिसंजय
आज से करीब आठ वर्ष पहले की बात है। मैं झारखण्ड राज्य के भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा की जिला संयोजक थी। भा.सं.ज्ञा.परीक्षा सम्पादित कराने हेतु मुझे अक्सर झारखण्ड के कई जि...
एक आश्रम में एक गुरु और उनके अनेक शिष्य रहते थे। गुरु बहुत वृद्ध हो गए। उनको अपना कोई उत्तराधिकारी निश्चित करना था। उन्होंने सभी शिष्यों को बुलाया औऱ कहा कि मेरे पांच प्रश...
तुम्हीं वास्तविक विश्व-देवता हो; बल्कि दो की भावना ही अयर्थाथ है - एक ही तो सत्ता है। ‘तुम और मैं’ कहना ही गलत है, केवल ‘मैं’ कहो। मैं ही तो करोड़ों मुँह से खा रहा हूँ; फिर मैं भू...
तू ही फितरत तू ही कुदरत तू ही मेरी किस्मत है तेरे सिवा मेरा ना कोई तू ही मेरी अस्मत है तू ही शंकर तू ही भोला तू ही तो जगदीश्वर है ना देखा भगवान को मैंने तू ही मेरा ईश्वर है नाम पता ना गुरुवर मेरे तू ही मेरा भगवन है कैसे कह दूं दूर हो मुझसे इर्द गिर्द तू हरदम है रुद्र भी तू है शिव भी तू है रुद्राभिषेक भी तू ही है श्रावण मास की सारी पूजा भाव में हर छन तू ही है!! @शशिसंजय
श्री नामदेव जी महाराष्ट्र के एक सुप्रसिद्ध संत थे। वे विट्ठल भगवान के बहुत बड़े भगत हुए हैं। उनका ध्यान सदा विट्ठल भगवान के दर्शन, भजन और कीर्तन में ही लगा रहता था। सांसार...
दर्द भी तुम हो दवा भी तुम हो उम्र भी तुम हो दुआ भी तुम हो आती जाती सांस भी तुम हो रोम-रोम की जान भी तुम हो नसों और नाड़ियों में तुम हो ख़ून की हर बूंद में तुम हो अस्थि और मज्जा में तुम हो तन और मन ये सभी ही तुम हो इच्छा-अनिच्छा ये भी तुम हो चाहत और नफ़रत भी तुम हो काया और माया भी तुम हो बस तुम ही तुम हो........ बस तुम ही तुम हो........ तुम्हीं रूबरू हो............ तुम्हीं रूबरू हो...........!! @शशिसंजय
मोक्ष प्राप्त करने वाली आत्माओं की संख्या अपरिमित है। उनमें से कुछ तो पौधों में हैं, कुछ पशुओं में, कुछ मनुष्यों में तथा कुछ देवताओं में हैं। पर सब-के-सब - उच्चतम देवता भी - अपू...
---तुझको अर्पण है मन मेरा, सबकी सब ये दुनियादारी, मन को तुम ही बांधे रखना, मैं आया हूं शरण तुम्हारी!! ---भीगते-भीगते वारिश में जब, दर पर तेरे पहुंचा हूं, देखके तेरी ...
श्रेणिक पुत्र मेघ ने भगवान् बुद्ध से मंत्र दीक्षा ली और उनके साथ ही रहकर तपस्या में लग गए। बिरक्त मन को उपासना से असीम शांति मिलती है। कूड़े से जीवन में मणि- मुक्ता की सी ज्यो...