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अश्क(आध्यात्मिक)-347

दाता आकर आज आपने, कहीं जो मुझसे प्यारी बातें। मन में ये विश्वास जगा है, जगते बीती आपकी रातें। ..... मैं ना भूल सकी हूँ तुमको, तुम भी कैसे भूल पाओगे। जब भी समय मिलेगा तुमको, मेरे पास ...

पागल(आध्यात्मिक)-348

दाता तुम्हारे प्यार ने पागल बना दिया। होली के इस त्यौहार ने तो खूब रूला दिया। क्या खेली थी होली, मैंने आपके साथ। उस याद ने माहौल को, रंगीन बना दिया। हंसते रहे थे आप, जब खेली थ...

मन आपको दिया था(आध्यात्मिक)_303

मन आपको दिया था, फिर क्यूँ भटकता है ये। कसकर पकड़ो इसको दाता, क्यूँ भगता है रे। दाता आपने वादा किया था, मुझको आप सॅभालेंगे। अपने प्यार को दिल में रखकर, मुझको ना गिरने देंगे। ...

होली खेलत दाता(आध्यात्मिक)-349

होली खेलत मेरे दाता, मेरे संग होली खेलें मेरे दाता। --मुख पै अबीर गुलाल लगायो, दाढ़ी मूॅछन पै रगड़ायो। हॅसत रहे मेरे दाता, मेरे संग होली खेलें मेरे दाता। होली खेलत.............. --पीले ला...

प्यार का कोई एक दिन(सामाजिक)-302

प्यार का कोई एक दिन नहीं होता। भावनायें ही प्यार की अभिव्यक्ति होती हैं। जब चाहे नोंक झोंक, जब चाहे प्यार करो। संघर्ष कितने भी आयें, एक दूसरे का साथ दो। दोनों ही थामकर एक दू...

शैल जीजी शान्तिकुन्ज(आध्यात्मिक)-301

मॉ नहीं पर मॉ जैसी वो, सब उसको जीजी कहते हैं। मॉ की सरल मूर्ति दिखती, सब उसको देवी कहते हैं। मॉ ने सत्ता जिसको सौंपी, सब पर प्यार लुटाने की। उसी प्यार की सत्ता को वह, दोनों हाथ ल...

प्यारी प्यारी सबकी बाई(व्यक्तिगत)-316

प्यारी - प्यारी सबकी बाई, मेरी प्यारी अच्छी मॉ। धैर्यशील, गंभीर - धीर तुम, सबसे सुन्दर मेरी माँ। --बोझिल ऑखें, थकती बाहें, चूल्हे पर लगतीं रहतीं। सब बच्चों की भूख मिटाने, पिसती ...

भोले-भाले(व्यक्तिगत)-300

भोले - भाले सीधे - सादे, सबसे न्यारे मेरे पापा। निश्छल बाहें स्नेहिल अॉखें, सबको प्यार लुटाते पापा। --ग्यान सिखाते, डॉट पिलाते, सबको अच्छी राह बताते। भूले - भटके, रूठे-बिछुड़े, स...

जीवन है(सामाजिक)-299

जीवन है एक धूप - छॉव, इससे तुम ना घबराना। जब भी चाहो, जब भी सोचो, बस आस - पास हमको पाना। बेशक....? जीवन की कुछ कटु स्मृतियाँ, तुमको हर वक्त सतायेंगी, पर..... सोच के देखो तुमने भी, पाईं हैं कि...

निश्छल बक-बक(व्यक्तिगत)-304

निश्छल बक.-बक, सरल हृदय और प्यार का सागर थे दादा। अनदेखी बड़बोली बहन के, शुभचिंतक...... थे दादा। तभी तो बहना की बीमारी सुन, तड़प उठे मेरे दादा। बार - बार हर बार ये जिद, मेरी विद्या (शक...

तुम्हारे बिना(व्यक्तिगत)-305

तुम्हारे बिना घर कितना वीराना था, सब तो घर में बस एक ही अफ़साना था। तुम ये करते, तुम ये कहते, सब अपनी अपनी यादें कहते। बातें होंगी बीता जमाना, तुम फ़िर से अब लौट के आना। जायेंग...

दिले शायरी-9

तुम जो आ जाते हो ख़यालों में मेरे, दिन और रात अच्छी गुजर जाती है, ख्वाबों में जब दिखाते हो अपना जलवा, लगता है कि ज़न्नत की रात आई है। .......... कौन कहता है मैने तुझे भुला रखा है, तेरी याद...

सरल ह्रदय की थी तुम बहना(सामाजिक)-282

सरल हृदय की थी तुम बहना, व्यक्तित्व तुम्हारा था बिन्दास. आगन्तुक का स्वागत करना, खुले हृदय से देतीं साथ। भीतर - बाहर एक सी रहना, यही तुम्हारी ख़ूबी थी। पीड़ाओं को हॅसकर सहना, ...

बचपन में(व्यक्तिगत)-306

बचपन में जिसको सॅभाले यूॅ रखा, अपने कलेजे में बसा के यूॅ रखा। उसी लाड़ले को अलग होते मुझसे, न जाने ये पल मेरे गुजरेंगे कैसे। --कमी हर समय मुझको खलती रहेगी, मेरी हर श्वॉस दुआ करत...

जिसने तुमको(व्यक्तिगत)-298

जिसने तुमको गर्भ में पाला, खुशियों की सौगात दी। आज नहीं वो बीच तुम्हारे, जिसकी तुम ही जान थीं। --सब रचना, संगीत उसी का, सारी खुशियां आज उसी की। चाहत उसकी प्यारी बेटी, बहू बने कि...

सेवानिवृत्ति 29/2/12(आध्यात्मिक)-297

क्या कहूँ मैं आपकी, निष्ठा का पारावार। हर चुनौती पूर्ण करता, रहा गुरु का प्यार। --आपके विश्वास से, चलती रही काया। ऐसे गुरु हैं आपके, कोई जान ना पाया। --रात भर जगना तथा, दिन में भी ...

जन्मदिन(पारिवारिक)-228

संकट हरण (हनुमान जी) की देन तुम, सबसे सुन्दर लाल। अन्दर की छमता भुलाकर, हो रहे तुम बेहाल। --क्या करूॅ, कैसे करूँ, यह समझ नहीं आता। हालत तुम्हारी देखकर, मन मेरा घबराता। --जिसने तुमक...

जन्मदिन 10/7/14(व्यक्तिगत)-296

मैं बुझता चिराग, तुम जलते दिये हो। मेरा प्यार आशा तुम, संग में लिये हो। --रहूॅ ना रहूॅ आशीष मिलते रहेंगे। तुम्हारी दुआ को, हाथ उठते रहेंगे। --मेरा पूर्ण विश्वास, संबल हो तुम ही। ...

दिले शायरी-15

..... आज मुझे बिसरी सी कुछ याद आई,        बचपन में झूलती मॉ की गोद याद आई,        काश...? फ़िर से वो दिन लौट आयें,        दुनियॉ से बचाने वाले ऑचल की फ़िर याद आई। ....... हमको भरम ये है कि सब कुछ हम...

दिले शायरी-16

--भरी भीड़ में चुपके - चुपके, कैसे तुम देखा करते हो,    लगता है जैसे तुम प्यारे, सबको मंत्र मुग्ध करते हो। -- कहीं दूर जब आप हैं जाते, मन के आप करीब न पाते      ना जाने क्यों मनुआ मेरा, ...

दिले शायरी-12

घर में घुसते हैं लोग रो - रोकर, जगह बनाते हैं अपनी रो - रोकर, जगह अपनी हुई ख़ुदा अपना हुआ, अब जमाने को दिखा ऑखें, ..................... लगा ठोकर? --तुमने जो मुझे डाल रखा है, ख़ुद के चरणों में, सोच लो उन कद...

अजब सा खौफ़(आध्यात्मिक)-295

अजब सा ख़ौफ उनकी ऑखों से बयॉ होते देखा। मुस्कुराती चिलमन को खामोश दरख्त सा देखा। अपना बनाकर लूटा है चमन को जिसने। उसी के दरम्यान लोगों को दहशत से गुजरते देखा। -तुझे क्या म...

दिले शायरी-13

-- निगाहें, मुस्कुराहट सब कुछ तो तेरा जुदा - जुदा।     तभी तो तुझको कहते हैं, "या रब" - "या ख़ुदा" !! -- कुछ ऐसी कशिश है तुझमें, जो हर जगह मिलती        नहीं     वर्ना तो हम गुनहगारों को, यहॉ पन...

दाता सब कुछ तुम्हें समर्पित(आध्यात्मिक)-280

दाता सब कुछ तुम्हें समर्पित, धन हो या फिर हो औलाद। मेरे मन को आप बना दो, आध्यात्मिकता की फौलाद। -ये सब मेरा, वो सब मेरा, ऐसा भाव न आने पाए। सब कुछ छोड़ तुम्हीं में मन हो, तुम बिन प्...

भेज रही हूँ तुम्हें निमंत्रण(आध्यात्मिक)-279

भेज रही हूॅ तुम्हें निमंत्रण, दाता यग्य में आने का। मन, वाणी और दिल में रहकर, सब संचालन करने का। -आप रहेंगे साथ यंत्रवत, काम करेगी ये काया। कुछ ना होगा पास फिरेगी, साथ - साथ फिर भ...