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चारों ओर(सामाजिक)-129

चारों ओर अँधेरा सा घिरने लगा है सूर्य का उजियारा उसे छॉटने लगा है रूढ़िगत परम्परायें अब टूटने लगी हैं लोगों में जागरूकता अब बढ़ने लगी है युवा पीढ़ी भी आगे-आगे बढ़ने लगी है दहेज की लोलुपता भी कुछ घटने लगी है आयेगा सतयुग और रामराज्य भी आयेगा नारियॉ भी बच्चों को सँस्कार देने में लगी है                              👣🙏🏻

राग-द्वेष(सामाजिक)-130

राग-द्वेष और अन्दर की ईर्ष्या जब तक नहीं मिट जाती है कितने भी जप-यज्ञ करा लो फ़र्क़ न कुछ पड़ने वाली है ख़ुशियाँ लेके दर-दर जाना ये तो ज़रूरी नहीं ही होता घर आये को प्यार जताना अपनापन तो यही है होता दिखलावे भी तरह-तरह के मन को जो भरमाते रहते हैं अपने भीतर कुछ होने का  वह ख़ुद अँहकार जतलाते हैं अधजल गगरी छलकत जाये ऐसा ही दिखावा भी होता है मेरे गुरुवर साधक को भला ये सब कुछ कैसे सुहा जाता है                 👣🙏🏻

भीड़-भाड़(आध्यात्मिक)-131

भीड़-भाड़ की दुनिया दाता  मुझको अब नहीं सुहाती है लोक-लाज सब छोड़ के अब तो तेरी अदा ही मन को भाती है बदरंगे हैं दुनिया के रँग सब तेरा रँग ही सुहाना लगता है छोड़ के सारे रिश्तों को अब तेरे ख़्वाब में ही मन रमता है झूठा-झगड़ा तेरा-मेरा सब नाम-प्रसिद्धि,पद और प्रतिष्ठा भाग रहे सब इसके पीछे-पीछे लेकर जानी है अन्त में बिष्ठा तुझसे जुड़कर भी बन्दों में  ये अकड़ कहॉ से आ जाती है तुम तो इतने करुणामई हो इनकी करुणा कहॉ खो जाती है                        👣🙏🏻

दुनिया(आध्यात्मिक)-132

दुनिया मुझको जाने  ऐसी नहीं है ख़्वाहिश  पहचानो तुम ही मुझको  इतनी सी है कोशिश कोई कुछ भी कहे मुझको  कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता तुम कुछ भी ज़रा सा कह दो  बहुत गहरे असर पड़ता अच्छों ने मुझको अच्छा  बुरों ने माना बुरा मुझको जिसने जैसा चाहा अब तक वो बना दिया है मुझको मिट्टी में बैठने की औक़ात है मेरी  मुझको सिर पै तुमने है बिठा दिया  कैसे शुकराना करूँ मैं भगवन तुमने अपनी मौज में रहना सिखा दिया                          👣🙏🏻

निंदा(सामाजिक)-133

निंदा में रस आता है हमको इसीलिये तो निन्दा करते कानों को डस्टविन बनाकर  सबको कचरा डालने देते घर के सामने कोई डाल दे कचरा उससे हम लड़ने लग जाते कानों में कोई डाले कचरा उसको हम ख़ुश होकर सुनते अपनी बुराई कोई कर दे सहन नहीं होती वह हमसे दूसरों की निन्दा का कचरा कानों में हम हरदम भरते कर्मों की ये पोटलियॉ हम कितनी-कितनी बॉधा करते कैसे खुलेंगी ये पोटलियॉ ये न कभी हम सोचा करते                    👣🙏🏻

ऑखिन देखी(सामाजिक)-134

सहन ना होना छोटी बात का कभी बड़ा बतँगड़ बन जाता है इसीलिये परिवारों में आजकल कलह का तांडव बढ़ जाता है पति-पत्नी के रिश्तों में भी अजब दरारें आ जाती हैं छोटी-छोटी बातों पर वो मॉ-बाप के घर को आ जाती हैं सहने की आदत ना डाली सोच-समझकर चल ना पाये इसीलिये बच्चे भी हमारे लौट के बुध्दू घर को आये काम न करना,काम न कराना बचकानी ये बातें करना मात-पिता को सिखाना होगा बच्चों को घर में काम भी कराना घरों में ख़ुशहाली लानी है तो ससुराल का ख़्याल भी रखना होगा सासू "मॉ" नहीं हो सकती हर पल बच्चों को काम तो सिखाना होगा                💔💔🖤💔💔

मेरे गुरुवर(आध्यात्मिक)-136

मेरे गुरुवर मेरे दाता,तुम अपनाये रखना । जब-जब भटकूँ मन से,मन को पकड़े रखना । --ये तन तो नहीं क़ाबिल,कुछ कर ना पाता है ।   मन भी तो चँचल है,बस ख़्वाब दिखाता है ।    एक तुम ही हो प्यारे,मुझको बॉधे रखना ।    मेरे गुरुवर------। --कर्मों का क्या बोलूँ,कुछ याद नहीं मुझको ।    कितना है कष्ट दिया,मेरे कर्मों ने सबको ।    अब तुम ही काटोगे,मेरे कर्मों का घेरा ।    मेरे गुरुवर-----। ---मैं शरण में आई हूँ,शरणागत हूँ तेरी ।     क्या-क्या अपराध हुये,अनजाने में मेरी ।     अब तुम ही बचा सकते,ये जन्मों का फेरा ।       मेरे गुरुवर-----।                                 👣🙏🏻    

कुछ दिन पहले(सामाजिक)-137

भगवन मेरे कुछ दिन पहले  आपने भेजा मुझको कुछ  गुणीजनों और ज्ञानियों के मेले में  तरह-तरह के फूल खिले थे  उस आवाजाही के झमेले में  धीरे-धीरे मँच पै आकर सब लगे थे अपनी बात सुनाने कुछ तो हँसाकर बात कह दिये  कुछ तो कहकर लगे सुलाने बिन देखे जो बोल सके  वे भी अपनी बात कह दिये लिखने के शौक़ीन रहे जो  वो भी अपनी कथा पढ़ दिये सबको देख के ख़ुद को देखा  मन तो हुआ बड़ा बेचैन कितना सब ज्ञानी हैं देखो  कितनी मेहनत करते दिन रैन ये काया कुछ सीख ना पाई बैठी रही आपके चरणों में  ये जीवन तो नादानी में बीता सीखना होगा अगले जनम में                   👣🙏🏻

ऑखिन देखी (सामाजिक)- 138

कुछ सालों पहले,एक महिला को लेकर घर वाले,किन्हीं सन्त के पास आये उन महिला का बदन फोड़ों से भरा था, मवाद फूट-फूट कर निकल रहा था, सभी जगह डाक्टरों से इलाज कराया, गन्डे-ताबीज़ भी बँधवाये,पीर-फ़क़ीरों से, कुछ फ़ायदा न हुआ,तब किसी ने उन्हें सन्त की शरण में भेजा था,उन्हें देखते ही सन्त चिल्लाने लगे,वहॉ से जाने को कहने लगे वे लोग रोते रहे गिड़गिड़ाते रहे,उन्हें मनाते रहे, बहुत देर तक बैठे रहे,कि शायद वे कुछ बोलें उम्मीद की किरण जगी,दयालु सन्त ने बोलना शुरु किया, तुम ठीक नहीं हो सकती,ये तो भोगना ही होगा ,तू नहीं तेरे पूरे परिवार को,ये कष्ट  झेलना ही होगा,डाक्टर थी तू पिछले जन्म में... ज़बरन लोगों को इन्जेक्शन लगाती थी,वे ही अब फोड़ा बनकर निकल रहे हैं,पब्लिक के पैसों से चैरिटेबल हास्पीटल बनाया था,खूब पैसा खाया लोगों से,पति-पत्नी दोनों ने मिलकर धोखा दिया पब्लिक को,तेरा पति कम्पाउन्डर था पिछली बार, अब ऊपर वाला तुम्हें जो दे रहा है प्रसाद मानकर भोगो,कोई इलाज नहीं इसका,दोनों हाथ ऊपर  उठाकर प्रार्थना के स्वर में बोल उठे,इसका इलाज तो उसी के पास है...उसी के पास है.....मैं कुछ भी सहायता नहीं कर...

मन समर्पित(आध्यात्मिक)-139

मन समर्पित तुम्हें कर दिया मन की वृत्तियाँ चँचल क्यों हैं  मेरे भगवन "मन" तो तुम्हीं हो फिर मन ये नासमझ सा क्यूँ है मन की सारी इच्छाओं को तुम अपने आप में विलीन कर लो मन शरण तुम्हारी पड़ा हुआ ये भाव प्रबल तुम ही कर दो मन की चँचलता भी हर लो और मन को मुट्ठी में कर लो ऐसा अगर करोगे तो मन मेरा चरणों में तुम्हारे टिक पायेगा  आगे-पीछे किधर से भी बस मोह नहीं आ पायेगा तुम जब साथ होते हो मेरे तब ही पूर्ण वैराग्य होता है पल भर तुमसे दूर हुई तो फिर सँसार चला आता है                       👣🙏🏻                       13/12/10             

रौनक़ तुम्हारी(आध्यात्मिक)-140

ये रौनक़ तुम्हारी ये ऊर्जा तुम्हारी ये ताक़त तुम्हारी इबादत तुम्हारी ये चाहत भी तेरी ये राहत भी तेरी ये ख़ुशियाँ भी तेरी ये इच्छा भी तेरी ये मन भी है तेरा ये तन भी है तेरा  ये ग़म सारे तेरे ये भ्रम सारे तेरे दुनिया के सारे ये बँधन भी तेरे नहीं मुझको मालूम कि क्या-क्या है मेरा केवल तू ही मेरा केवल तू ही मेरा मैं तेरी हूँ भगवन सभी कुछ है तेरा                     👣🙏🏻

दिले शायरी-29

--तेरे अलावा और किसी की बात नहीं आती मुझको    क्या है जादू ऐसा तुझमें पता नहीं लगता मुझको --तेरे मेरे दरमियाँ कुछ कशिश है अजीब सी           क्या बताऊँ कैसे भी छुड़ाये नहीं छूटती     --...

दुखों से पहचान(आध्यात्मिक)-141

दुखों से पहचान क्या बढ़ी कि तुम ही मिल गये सुखों से दोस्ती होते ही क्यों तुम  दूर हट गये तुम जानते सभी को कि कब कौन कैसा होगा तभी तो आगे बढ़कर तुम दुखों में थाम लेते सुखों में बाढ़ होती तमाम रिश्तों व दोस्तों की तभी तो तुम अकेले मुझको यूँ ही रहने देते आते रहा करो तुम यूँ छोड़ो ना अकेले हरदम ही साथ रहकर तुम लगते भले-भले से                              👣🙏🏻

गुरुवर मेरे सैर करा दी(आध्यात्मिक)-142

गुरुवर मेरे सैर करा दी तुमने दुनिया ज़हान की  सँग में रहकर हरदम ही अपने चरणों में पनाह दी  कैसे करते हैं शुकराना ये भी मुझको आता नहीं  तुम्हारे प्यार के बदले तुमको कितना क्या मैं बोलूँ पता नहीं तुम तो बहुत क़रीब हो मेरे तुमसे कुछ भी छुपा नहीं  तुम तो इतना ध्यान है रखते कितना कुछ तुमने दिया नहीं  मन में सोचा पूरा कर देते मुँह को तुम ना खोलने देते इतनी पकड़ तुम्हारी पक्की दूर का सोचा तुम पढ़ लेते                  👣🙏🏻

क़लम के भीतर(आध्यात्मिक)-143

क़लम के भीतर में  भरी है काली स्याही तभी तो जब देखो वो  दर्द ही उगलती है बर्तन में कुछ भी रखकर  जब आग पर चढ़ाते हैं उबल-उबल कर बाहर  बह निकलता है जो भीतर भरा हुआ था बर्तन के मेरे बासन में भी कुछ ऐसा ही भर दिया तुमने.... जितना उबलता है दर्द ही निकलता है कुछ ऐसी आग और कुछ ऐसा बासन फिर से बनाया जाये डालो कुछ भी उसमें भले ही मगर बनावट ही निकल कर आये जो ख़ुशी से सबको भाये                     👣🙏🏻

तुम्हीं तो मेरे(आध्यात्मिक)-135

तुम्हीं तो मेरे सब कुछ हो दाता,                       मेरी ये नैया सँभाले रखना । चाहूँ न तुमसे कुछ और दाता,                      शरण में अपनी बनाये रखना । --शरण में आई हूँ जब से तेरी,                          दशा सुधारी है तुमने मेरी । यही मैं तुमसे माँगू हे गुरुवर,                         ऊँगली हमेशा पकड़े ही रहना । --किसी को दुख ना पहुँचे मुझसे,                       ख़्वाबों में मेरे रहो तुम हरदम । छवि जो दीखे तेरी ही दीखे,                       परछाईं बनकर खड़े ही रहना । --नज़र तुम्हारी पड़ती रहे बस,                       रहमोकरम पर चलती रहूँ मैं । अन्तिम समय तक मुझको निभाना,     ...

दिले शायरी-26

--आते रहा करो मुस्कुराते हुये से कभी-कभी    तुम्हें देखकर मेरा दिल भी खिलखिला उठता है --तुमसे जुड़कर ही जाना पायी हूँ ख़ुद को    वर्ना भीड़ में दुनिया की कहीं खो गई थी मैं  --भीतर ...

रूह में पहुँचकर(आध्यात्मिक)-144

रूह में पहुँचकर समा जाते हो इतना कि बाहर से इसका अहसास भी नहीं  आनन्द की उस सीमा तक पहुँचना कि और कुछ भी हमें तो याद नहीं  सुकून दे जाता है उस वक़्त का आलम कि ज़रा सी आहट भी बर्दाश्त नहीं  बस जिस हाल में हैं बने रहें उसी में  दूसरे किसी का गुज़रना भी सहन नहीं                           👣🙏🏻

राह दिखाने(आध्यात्मिक)-145

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राह दिखाने दुनिया को तुम,                        आये और आकर चले गये । अपने सब बच्चों को काम बता,                       और मशाल थमाकर चले गये । --वही काम और वही मशाल,                        की छाया में दुनिया सारी है । सदबुध्दि का मंन्र जो दे गये,                        वो सभी का जपना जारी है । --जीते थे सब अकेले-अकेले,                       पूजा-पाठ भी अकेले-अकेले । सामूहिकता की बात कह गये,                        वो काम अभी भी जारी है । --मेरे गुरुवर कितना कुछ तुम,                       क़दम-क़दम पर बतलाते गये । जीवन में उन सबको लेकर,                ...

गणित(सामाजिक)-146

जीवन एक गणित है भाई मुझको तो ये समझ न आई गणित जोड़ना गणित घटाना गुणा गणित में भाग गणित में  सब कुछ गणित में कर लो भाई दोस्ती को जोड़ दो  दोस्त बढ़ जाते हैं दुश्मनी घटाओ तो  दुश्मन घट जाते हैं ख़ुशियों को गुणा कर दो  चौगुनी हो जायेंगी दुखों को भाग दे दो  कम होते जायेंगे इतना कर लोगे तो  वर्गमूल आ जायेगा ज़िन्दगी का फन्डा फिर  समझ में आ जायेगा $शशिसंजय$       💔💔🖤💔💔

अश्क़ गिर न जायें(आध्यात्मिक)-147

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अश्क़ गिर न जायें इतना ही प्यार कीजिये पिघल जाये रूह मेरी सॉसों को गर्म कीजिये आज तो अज़ीज़ मेरे गले लगा ही लीजिये कौन जाने कब कहॉ रस्ता ही बदला कीजिये आरज़ू इतनी सी है जीवन भर साथ दीजिये दर्द जो जिगर में है अल्फ़ाज़ में भर दीजिये दूर ना जा पायें तुमसे ख़्वाब में ही आ जाइये की..मुहब्बत इस क़दर बस इसको ना ठुकराइये                               

आ जाओ अब तो दाता(आध्यात्मिक)-148

आ जाओ अब तो दाता,अब सॉझ ढल चुकी है  रात भी अँधेरी अब गहरी होती ही जा रही है मौन सा है छा गया अब तो चारों ओर अमावस की रात में चन्दा ना किसी ओर आहट सी तेरे आने की लगती है बार-बार दूर गगन के मुझको ना दीखे आर-पार अब आ भी जाओ प्यारे अब और ना सताओ आकर के अपनी रूह में इस रूह को बिठाओ                             👣🙏🏻

प्रेम की सीढ़ी(आध्यात्मिक)-149

प्रेम की सीढ़ी चढ़ ना पाये बाक़ी सारे काम कर लिये इसीलिये तो बाहर-भीतर थोड़ा-थोड़ा ग़म कर लिये प्रेम का प्याला जब-जब पीया ख़ुशी से थोड़ा झूमा किये तेरे साथ में रहकर प्यारे  ख़ुशी का प्याला पिये गये दिन भर जागे रहे यहॉ पर रात भी जागे बिता दिये तेरा साथ ना छूटे कभी भी यही सोच के जागा किये तेरा सत्संग तेरी सँगत और रात जागरण किया किये तभी तो तेरे प्रेम में प्यारे सारे ही पागल हुआ किये                👣🙏🏻

सॉसों की हर आहट(आध्यात्मिक)-150

सॉसों की हर आहट पर मैं,                     तेरा ही नाम लिखा पाती हूँ । ऊपर नीचे जब सॉस है जाती,                    उस वक़्त तुझे ढूँढा करती हूँ । --मन तो मेरा पास है तेरे,                   क्या सोचूँ क्या समझूँ मैं । दिल में भी आकर बैठे तुम,                  कुछ भी ना कर पाती मैं । --तन ही केवल बचा है मेरा,                 याद में तेरी पड़ा रहता है । ऑंख निगाहें सब कुछ ही तो,                  तेरी ही राह तका करता है । --सब कहते हैं बार-बार मैं,                  एक ही बात कहा करती हूँ । कर भी क्या सकती हूँ मैं,                    तो तेरा ही नाम रटा करती हूँ ।                   ...

मेरे गुरुवर(आध्यात्मिक)-151

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बादलों के बीच से झलक तुम्हारी दिखती है सूरज के बीच से मुस्कुराती हुई सी लगती है दोनों हाथों को उठाकर आशीर्वाद की मुद्रा में   सब पर बरसाते देते हो अपनी रहमतों की वारिश तब पूरी दुनिया ही मुझको ख़ुशनुमा लगने लगती है और कोई नहीं मेरे प्यारे गुरुवर जन्म जन्मान्तरों से  मॉ-बाप के रूप में हर बार तुम ही मिलते आये हो मुझ पर अपने प्यार की बरसात करते आये हो ना जाने कब से ढोते रहे हो भार तुम दोनों मेरा तुम्हारे ही उपकारों से भरा रहा है हर जीवन मेरा

गुरुवर तुमने(आध्यात्मिक)-152

गुरुवर तुमने जितना घुमाया,                        बस उतना ही मैं घूमी हूँ । शरण में तेरी रहकर मैं तो,                    जाने क्या क्या सीखी हूँ । --तीरथ सारे शरण तुम्हारी,                      सामने हो मूरतिया तेरी । गुरुवर शरणं गच्छामि का,                     मंत्र है जपती जिभिया मेरी । --मन का चँचल होते जाना,                    दिल की धड़कन तेज़ हो जाना । और ना जाने क्या-क्या होना,                      तेरी शरण में शान्त हो जाना । --सारी इन्द्रियॉ मचल-मचल कर,                      कितना कुछ शोर मचाती हैं । जैसे ही तुम पास में आये,                   सारी ख़ुशियाँ पास आ जाती...

क्या ही अजूबा(आध्यात्मिक)-153

क्या ही अजूबा हो जाता है जब शक्ति तुम्हारी मिलती है जो चल ना पाते पॉवों से उनकी राहें चल पड़ती हैं बोल न पाते हैं जो बन्दे वे गूँगे भी बोला करते हैं मरणासन्न पड़े जो घर में  वे उठकर बैठा करते हैं तेरी ताक़त और तेरे इशारे पर चलती दुनिया सारी है तू ना चाहे किसी तरह भी बन्द हो जाती दुनियादारी है अपनी इस शक्ति से बराबर कुछ छींटे मुझको देते रहना लुढ़क-पुढ़क मैं जाऊँ कभी तो तन और मन को सँभाले रखना                  👣🙏🏻

रँग- बिरँगे ग़ुब्बारे(आध्यात्मिक)-154

रँग-बिरँगे ग़ुब्बारे जब,                आकाश में छोड़े जाते हैं । उन्हें देखने सबके सिर,                ऊपर को मुड़ते जाते हैं । --सोचा करती हूँ तब मैं भी,                हम सबका जीवन भी ऐसा है । डोर किसी के हाथ है प्यारे,                 जीवन भी उड़ता जाता है । --तरह-तरह के मन वाले हम,                        रँग-बिरँगे ग़ुब्बारे हैं । तुझसे ऊपर मैं ही उड़ूँगा,                       अद्भुत ऐसी सोच वाले हैं । --डोर हवा में जब छोड़ी हमने,                     उड़ते हुये हम आ गिरते हैं । अरमानों के ढेर से सपने,                      सब कुछ नीचे आ पड़ते हैं । --कौन बचाये हमको प्यारे,           ...

दिल के भीतर(आध्यात्मिक)-155

दिल के भीतर की मूरत को,                     हरदम पूजा करती हूँ मैं । लोग कहें मैं हुई हूँ बाबरी,                     गुरु को छोड़ चुकी हूँ मैं । --गुरु कहे मैं अन्दर बैठा,                  तुझको ही देखा करता हूँ । मन्दिर मस्जिद गुरुद्वारे से ज़्यादा,                 दिल में ही तेरे रहता हूँ । --दर दर भटकाया है तुझको,                  अन्तर्मन में लाने को । दुनिया कैसे जानेगी ये,                   क्या करवाना है मुझको । --दिन और रात मुझी में रहना,                  और न कुछ भी करना है । मेरा काम और मेरी पूजा,                  यही तो तेरा गहना है ।                  ....किसी से अब ना डरना...

आशा की किरण(आध्यात्मिक)-156

आशा की किरण जगाये रखना,                 दिल में दिया जलाये रखना । जब जब बाती डगमगाये,                     दोनों हाथ लगाये रखना । --श्वॉस श्वॉस में मोती बिखरे,                    उनको कैसे आज समेटूँ मैं । एक एक मोती बीन बीन कर,                        माला बनाती जाती हूँ मैं । --इस माला को पूरा कर दो,              अपना नाम औ प्यार भी लिख दो । जपती रहूँ मैं तेरे नाम को,                        इतनी मुझमें शक्ति भर दो । --प्रेम का धागा याद के मोती,                         जब दोनों ही मिल जायेंगे । उँगलियाँ फिरेंगी प्रेम से उन पर,                            तब वही गीत बन जाये...

ऑखिन देखी(आध्यात्मिक)-157

अजनबी शहर के अजनबी दोस्त विदाई के समय न जाने क्यूँ  रो पड़े फफक कर कहने लगे अब कब आओगे आपने कम से कम दर्द तो सुना यहॉ फ़ुरसत नहीं किसी को मँजिलें बड़ी हैं पर दम घोटूँ वातावरण है अकेले हैं हम सब कहने लगे व्यथा अपनी आग्रह जल्दी आने का वो प्यारा दोस्त दुम हिलाते हुये दौड़कर पास आ गया चाटने लगा पैरों को  जैसे कह रहा हो जल्दी आना गाड़ी में बैठते ही गोदी में सिर रख दिया सिर पर हाथ फेरती रही  कितना मासूम प्यार है ये सबके अपने अपने क़िस्से हैं दर्द भरी कहानियॉ हैं क्या कर सकती हूँ मैं  केवल केवल सुन सकती हूँ आप सभी तक लेखन के माध्यम से पहुँचा सकती हूँ प्रार्थना कर सकती हूँ सबके सुखी होने की बस..और कुछ नहीं  ज़िन्दा रही तो दुबारा मिलूँगी चल पड़ी ये सोचकर वहॉ से दूर तक हिलते हुये हाथ दिखाई पड़ रहे थे कुछ के ऑसूँ गालों पर लुढ़क रहे थे सोच रही थी शायद...., सत्संग (सत्य का संग)इसी को कहते हैं                          💔💔🖤💔💔