संदेश

सितंबर, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

पितृपूजा(सामाजिक)-6

जगह-जगह आजकल पितृपूजा चल रही है जानते हैं हम सभी भी बस मानते कुछ भी नहीं आने वाला कल हमारा भी ऐसा ही होगा न ---? आज स्थूल शरीर से चल-फिर रहे हैं कल सूक्ष्म शरीर में रहना होगा फिर भी ...

बेचैन(सामाजिक)-5

बेचैन हुआ जाता हूँ परेशान लोगों की परेशानी देखकर ख़ुद की तो ख़बर ही नहीं मुझको तुमने ये सिखाया भी तो नहीं दुआ के लिए हाथ उठाता हूँ जब भी पूछते हो तुम कि-बोल क्या चाहिए  ? कह न प...

यादों के झरोखे में(आध्यात्मिक)-4

यादों के झरोखे में जब भी झॉका कुछ अच्छा सा महसूस हुआ तेरे सामनेे सजदा किया और चरणों को तेरे मैंने छुआ जो पल बैठ गुजारे मैंने छॉव में तेरी हँसते हुए सारे तीरथ पाये अब तक ख्व़...

कैसे कह दूँ(आध्यात्मिक)-2

कैसे ये कह दूँ मैं भी कि संसार ही अपना है तेरे सिवा तो मुझको सब दिखता सपना है पिछले जन्मों के बंधन इस बार भी आये हैं लेन-देन बाक़ी था जिनका लेने सब चलते आये हैं जब-जब नैया डूबन ...

जो छूटा नहीं(आध्यात्मिक)3

जो छूटा नहीं-रूठा भी नहीं वो हर पल पास ही रहता है कैसे करूँ शुकराना उसका हर श्वॉस में भी वो रहता है पूछते हैं कभी कुछ प्यारे क्या वो-- याद नहीं आते  ? कैसे बताऊँ उनको दाता दूर नही...

जो भी(आध्यात्मिक)-1

जो भी कराना हो तुमको तुम कैसे भी करवा लेते हो मुर्दों में भी जान डालकर उनसे काम करा लेते हो दिल दिमाग और काया में अब पहले जैसी बात नहीं जाने कैसी फूँक भर देते समझ न आता मुझे कभ...

तुझसे लगन(आध्यात्मिक)13

तुझसे लगन लगी है जबसे नींद नहीं मुझको आती है हर पल- हर छिन जाने क्यों बस तेरी याद सताती है युगों युगों से तेरे दर पर सबने ही ख़ुद को खोया है फ़िर भी कितना निष्ठुर है तू गहरी नीं...

करते-कराते(आध्यात्मिक)-16

करते-कराते सभी तुम्हीं हो फ़िर भी भ्रम हो जाता है करने वाला "मैं" ही हूँ बस अंहकार जग जाता है मेरे सतगुरु कृपा करो अब सारे दोष मिटा डालो एक-एक कर दूर करो सब दोषों के फ़न को कुचल ...

सिद्ध सन्त(आध्यात्मिक)-17

सिद्ध सन्तों के पास जाते-जाते हम हर समय कुछ न कुछ याचना ही करते रहते हैं और वे भी----- सबकी मुसीबतों और कष्टों को हरते ही रहते हैं लेकिन----- उनके शरीर त्याग देने पर हम अपने स्वार्थ ...

सिहर उठा मन(सामाजिक)-18

सिहर उठा मन हैवानियत की पराकाष्ठा देखकर सदियों से महिलाओं पर अत्याचार सबसे ज्यादा महिलाओं ने ही किये हैं और-----? बेचारा पुरुष------? मूक दर्शक बनकर खड़ा रहा आज उलट गया है सब बेचार...

तेरे वास्ते(आध्यात्मिक)-20

तेरे वास्ते दुनिया के हर इल्ज़ाम को सिर पर रखा है तेरे वास्ते दुनिया के कड़वे हर घूँट को हरदम पीया है हर पल तेरी रीत रही है ख़ुद बैठ इम्तिहां लेने की तुझे चाहने वालों की अब त...