संदेश

मार्च, 2018 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

मैंने भी सुना है(आध्यात्मिक)-158

मैंने भी सुना है न जाने,                    किसने ख़बर फैलाई है । तुझसे मिलना मेरा अब तक,                    बेन्तहा मेरी ही रुसवाई है । --क्या  फ़र्क़ पड़ता है मुझको,                    खो जाने दो उसकी बाँहों में । ये जन्नत भी जहाँ में,                    किसी किसी ने ही पाई है । --जिसका नज़रिया जैसा होगा,                        वो वैसे ही कह पायेगा । पेड़ लगाया है बबूल का,                 ख़ुशबू गुलाब की कैसे पायेगा । --ज़माने ने भला सदियों से,                   आज तक किसी को छोड़ा है । दर्द जिसने पाया है अभी तक,                     वो ही तो निखर के आया है ।          ...

ऑखिन देखी(सामाजिक)-159

दिन रात लगी रहती सेवा मे  फिर भी सासू जी ख़ुश ना हैं  रोज़ रोज़ की चिक चिक से  वो हरदम ही रोया करती है   समझ नहीं आता है उसको  कहॉ जाये वो क्या तो करे  मॉ और बाप नहीं दुनिया में   जिनसे वो मन की व्यथा कहे  फैल गया ठोकर से दूध तो  बहू पर लगी चिल्लाने सासू  अँधी है क्या ?दिखता नहीं है  तेरे बाप के घर का है क्या ?  बहू बेचारी चुप थी क्या बोले? इसी तरह कुछ दिन फिर बीते एक दिन सास की ठोकर से घी का डिब्बा बिखरा जमी पर अब भी सासू उस पर चिल्लाई अँधी है क्या ? पता नहीं है ? डिब्बा यहॉ पर रखते हैं क्या ? ख़र्चा कैसे चलता है ?  तुझे पता क्या ?  कब तक ऐसा होता रहेगा  समझ नहीं आता है मुझको  कहीं बहू पर सास है भारी  कहीं बहू का पलड़ा भारी        💔💔🖤💔💔

आ भी जाओ(आध्यात्मिक)-160

आ भी जाओ अब तुम कुछ और ना बताया करो बहाने तरह तरह के तुम कुछ और ना बनाया करो --आ जाने से तुम्हारे ये दिल मचल सा उठता है   प्यार की हिलोरें वो बार बार ले उठता है --तुम कैसे समझोगे बिछड़न की इस तड़पन को   कैसे बताऊँ फिर से मैं अपनी ही इस भटकन को  --कहती हूँ कितनी बार तुम आते रहा करो यूँ ही   लगती विरह की आग को आकर मिटाओ तुम ही                                👣🙏🏻

सुख आते ही(सामाजिक)-161

सुख आते ही बौरा जाने की,                       आदत हमारी हो गई । दुख आते ही घबरा जाने की,                       फ़ितरत हमारी हो गई । --सुख की पहचान को अक्सर,                       हम धन से जोड़ा करते हैं । तुमसे जुड़ने वाले धन पर,                       ध्यान नहीं हम दे पाते हैं । --हारी-बीमारी-ग़रीबी को,                       हम दुख से जोड़ा करते हैं । तुमसे छूटने की बीमारी को,                        हम दुख ना समझा करते हैं । --तेरी प्रार्थना ,तेरी याद में ,                         जो हर पल जीया करते हैं । वही धनी हैं सबसे ज़्यादा जो,                   सब...

जन्मदिन(आध्यात्मिक)-162

सन्तों का संसार यहॉ पर, सन्तों की यहॉ सन्तानें हैं । जन्म जिन्होंने दिया जिन्हें भी, (गुरुदेव माताजी से आहुति व छुटकी तक) सब पर सन्त कृपा ही है । गीता जयन्ती पर ख़ुद है जन्मी, रामनवमी पर पुत्र हैं जन्मे, ऐसी जीजी अन्नपूर्णा हमारी, जिन्होंने चिन्मय भइया जन्मे । रूपचतुर्दशी पर जन्म है जिनका, ऐसे (भाईसाहब हमारे)पिता है न्यारे । मात-पिता दोनों के प्यारे, चिरँजीव चिन्मय सदा दुलारे । महाकाल-महाकाली के वँशज, जो दुनिया को राह दिखाते हैं । सन्तों की वँश परम्परा बढ़ाने, हर पीढ़ी में सन्त ही आते हैं ।  (चिन्मय भइया के जन्मदिन पर)              👣🙏🏻

जितनी गाथा कहूँ तुम्हारी(आध्यात्मिक)-163

जितनी गाथा कहूँ तुम्हारी,                    उतनी ही बढ़ती जाती है । साथ तुम्हारा,बात तुम्हारी,                     सब कुछ याद दिलाती है । --नख से सिर तक ध्यान तुम्हारा,                          हरदम बना ही रहता है ।    चरणों के चरणामृत का मुझको,                        स्वाद बना ही रहता है । --तिलक लगाना फूल चढ़ाना,              चरणों में फिर सिर को झुकाना । सामने बैठे हो तुम मेरे,               उस पल की क्या बातें बताना । --स्वर्ग का मुझको पता नहीं है,              मरने के बाद ही मिलता होगा । जीते जी का स्वर्ग मिला है,               सबको जो ना मिलता होगा ।                  ...

सागर के बीचों बीच(सामाजिक)-164

सागर के बीचों-बीच से छुपकर सूरज जब घर को लौट जाता है दुनिया उसको देखने दौड़ी आती  सनसैट (sunset) वो कहलाता है दृश्य सुहाना हो जाता है...... जल में वो डूबता दिखता है लाल रश्मियाँ देकर जल को सुन्दरता बिखराता जाता है थककर चूर जब हम हो जाते  मुँह लटकाये घर आया करते हैं नया प्रकाश,नई प्रेरणा,नई वो ताक़त  क्यों सूरज से हम ना ले पाते हैं अन्दर का सूरज बुझ ना पाये हम सब यही प्रार्थना करते हैं प्रेरणा पुन्ज बने यह सूरज जो सबको उर्जा से भरते हैं                 👣🙏🏻

सागर किनारे(आध्यात्मिक)-165

यहॉ सागर के किनारे पर बैठी मैं लहरों को ही तका करती  लगता बस अब तुम आ ही गये जब लहरें सागर से उठा करतीं पेड़ों के पत्ते हिलते जब-जब आवाजें सर्र-सर्र आया करतीं तब ढूँढने तुमको इधर-उधर  मैं सरपट ही दौड़ा करती रँग-बिरँगे परिधानों में जब देश-विदेशी यहॉ घूमा करते तब मेरी निगाहें उस भीड़ में भी बस तुमको ही ढूँढा करतीं अब आ भी जाओ बहुत हुआ अब रात घनेरी छा ही गई तेरे ख़याल मुझे आते ही गये मैं सुध-बुध अपनी खोये रही                   👣🙏🏻

तूने जो छेड़े तार(आध्यात्मिक)-166

तूने जो छेड़े तार,मुझको क्या हो गया । मन में हुई झँकार,ऐसा क्या हो गया । --झूमती रहती हूँ मैं,हर पल नशे में चूर ।   प्यार का सा ये नशा,आज मुझको हो गया । --दर पर तुम्हारे भीड़, कितनी लगी है आज ।   फिर भी निगाहों से,पर्दा आज हट गया । --झीनी सी चादर थी, बस तेरे-मेरे दरमियाँ ।   हल्का सा कोना आज,ख़ुद-ब-ख़ुद हट गया ।                            👣🙏🏻

तुम चाहते हो जोड़ना(आध्यात्मिक)-167

तुम चाहते हो जोड़ना तभी तो जुड़ पाता है कोई वर्ना बिसात क्या कि संसार को छोड़ पाये कोई कभी रिश्ते-कभी यारी कभी अपने-कभी सपने  कोई न कोई फँसाये रखता है जाल में अपने और तो और धन भी खींचा करता है अपनी ओर कितने लुभावने आकर्षण हैं इस मायावी दुनिया के तुम ही खींच सकते हो  सबसे छुड़ाकर मुझको मेरे प्यारे गुरुवर          👣🙏🏻

यादें(व्यक्तिगत)-168

यादें ही जीवन का फ़लसफ़ा होती हैं अच्छी हों तब भी-बुरी हों तब भी अपने-अपने नज़रिये से सबमें ही कुछ न कुछ ख़ूबियॉ हैं जो याद आने को मजबूर  कर दिया करती हैं किसको कहें पराया सभी तो अपने हैं सुख हो या दुख हो  सभी के अपने सपने हैं अच्छी यादें अच्छी बातें  ख़ुशनुमा हो जाती है बुरी यादें बुरी बातें  दिलों को दुखा के जाती हैं अक्सर एक रँग-बिरंगी छोटी सी चिड़िया अपनी प्यारी आवाज़ से अलसुबह मुझे उठाने आ जाती है आज मैं बहुत दूर हूँ उससे लेकिन वो ज़रूर आती होगी मुझसे मिलने मुझे उठाने ये सोचकर मुझे बहुत याद आती है उस नन्हीं सी जान प्यारी सी दोस्त की वो भी ज़रूर याद करती होगी मुझे                     💔💔🖤💔💔

दिले शायरी-10

--तेरा रँग सब पर छा जाये ऐसी रँगत दे दे मौला तेरी क़लम से निकला जादू सबकी क़लम चला दे मौला --बिन बुलाये भी कभी-कभी तो आ भी जाया करो बार-बार तुम्हें बुलाना ही क्यूँ पड़ता है..मेरे प...

दूर नहीं जाना है(आध्यात्मिक)-169

दूर नहीं जाना है अब तो,              आस-पास ही रहियेगा । इधर-उधर भटकन जब आये,                राह दिखाते रहियेगा । --जैसी भी हूँ तेरी ही हूँ,                  यही फ़लसफ़ा याद रहे । हर कमियों के साथ में मुझको,                  अपना बनाये रखियेगा । --ख़्वाहिशों के महल नहीं हैं,                  इक छोटी सी गुज़ारिश है । कुछ भी तुमसे मॉग न पाऊँ,                  इतनी सी रहमत रखियेगा । --आडम्बर से बची रहूँ मैं ,                   प्यार का दिया जलाके रखूँ । जब-जब ऑधी तूफ़ा आये,                     शम्मॉ जलाये रखियेगा ।                               👣🙏🏻

ध्यान में(आध्यात्मिक)-170

ध्यान में हरदम सूरत तेरी, क्या ही ग़ज़ब ढाया करती है। तन भले ही जीर्ण-शीर्ण हो, मन को फ़ौलाद बनाती है। --तनिक कहीं से छाया अँधेरी,    इस मन को ना छूने पाये ।     तभी तो तन और मन दोनों पर,      हरपल नूर की वारिश होती है । --ध्यान गुरु का करने का ये    फ़लसफ़ा बहुत ही अच्छा है।     जो मॉगो वो मिलता है और      मन आनन्द में हरपल रहता है। --तुम्हें ध्यान कर तुम्हें प्यार कर,     कितना कुछ हमने पाया है ।     गूँगे का गुण हो गई वाणी,      शब्द नहीं कुछ कह पाया है।                          👣🙏🏻         

रँगत(आध्यात्मिक)-171

रँगत में तेरी कुछ अलग ही रँगत ख़याल-ओ-ख़्वाब में अलग ही चाहत देखी हैं तुमने भी कितनी ही शिद्दत फिर भी बिखेरी हैं ख़ुशियाँ ही अब तक गले लगाया रोते हुओं को तुमने पलकों बिठाया आशिक़ों को तुमने महफ़िल तुम्हारी ये सजती रहेगी शागिर्दों के मेले भी भरते रहेंगे मन्नत और जन्नत, दुआ और फ़क़ीरी  सलामती की दुआयें सब करते रहेंगे दाता हो देने की आदत है तुम्हारी लेने सभी कुछ न कुछ आते रहेंगे                      👣🙏🏻

मेरी निराली गुरुमाता(आध्यात्मिक)-172

चित्र
नव दुर्गा के इन रूपों में,              दुनिया में तुम बसती हो मॉ । तेरा रुप अजब ही निराला है,               हम सबको प्यार लुटाती मॉ । --मुझे तेरा भी तो ख़याल है ये,               कहकर तुमने बुलवा ही लिया ।    करुणा की मूरत हो न्यारी,                 करुणामई मेरी प्यारी मॉ । --श्रध्दा विश्वास न हिल पाये,                 जब याद किया दौड़ी आईं ।    औलाद की ख़ातिर ही तो तुम,                 इतना सब कष्ट उठाती मॉ । --तुम जानती हो मुझको जबसे,                    जब मॉ के गर्भ में डाला था ।    तब से ही सताती आई तुम्हें,                    तुम फिर भी गले लगाती मॉ । --तुम अच्छी तरह समझती हो,                 ...

मेरे गुरुवर(आध्यात्मिक)-173

मस्ती का आलम हो जाता जब ख़्वाब में तुम आ जाते हो चरणों में बिठाकर अपने तुम बस ख़ुशियाँ बिखेरे जाते हो ना जाने मौन की भाषा में तुम क्या-क्या ही समझा जाते हो जब तक रहते हो साथ में तुम  केवल मुस्काके देखे जाते हो कभी सामने भी आ जाते ग़र हम चरणों में सजदा कर लेते तेरी बिखरी है रहमत जो यहॉ  उससे अपना दुपट्टा भर लेते मैं क्या कुछ बतलाऊँ मेरे गुरुवर अच्छा लगता है मुझको कितना जैसे चॉद से तारों को घर लाकर  पूरे ऑगन में कोई बिखेरे जितना                      👣🙏🏻

गुरुदेव प्यार का सागर(आध्यात्मिक)-174

चित्र
गुरुदेव प्यार का सागर हो तुम,                अब तक प्यार ही  बॉटा है । शिष्यों के हर कष्ट को तुमने,                  अपनी ही ढाल से काटा है । ---कितना बड़ा काम कर गये,                 सदियों तक सब याद रखेंगे । लाल मशाल थमा दी उनको,                  जो आगे बढ़कर काम करेंगे । ---नवयुग की नवयोजना तुम्हारी,                     कितना आगे पहुँच चुकी है ।     नारी सदी की घोषणा तुम्हारी,                     देखो अब चरितार्थ हो चुकी है । ---तुम दोनों की त्याग-तपस्या,                         देखो फलीभूत होने वाली है ।     अब तो पूरी दुनिया गुरुवर,                          गायत्रीमय हो...

मन के मन्दिर में(आध्यात्मिक)-175

चित्र
मन के मन्दिर में बैठे हो अच्छा लगता है मुझको --न दर्शन के लिये लाइन में लगना   न ही भारी भीड़ में धक्कों का लगना --न पुजारी को दिये लड्डुओं को देखना   न बाहर उतारी चप्पलों की चिन्ता करना --और भी बहुत सी बातें हैं अन्दर में मेरे    जिनने बहुत ही बदल दिया है मुझको  --अब नन्हें बच्चों में, बुज़ुर्गों में, पेड़ों में,   पत्तों में, झाड़ियों के झुरमुट में, पशुओं में, --पक्षियों में, जीवों में, जन्तुओं में, ज़र्रे-ज़र्रे में,    अपना एहसास दिला जाते हो हरदम मुझको ।         

याद तेरी आती है तब(आध्यात्मिक)-176

याद तेरी आती है तब,                चरणों को दबाती जाती हूँ । शरण में तेरी हूँ मैं दाता,                   मन ही मन गीत सुनाती हूँ । ---तुम तो एकटक देखा करते,                         पास में आने वालों को । मेरी निगाहें देखा करती हैं,                          तब तेरे ही चरणों को । ---सिर तो झुका ही रहता है,                     मन जाने कहॉ खो जाता है । दिल में कुछ घबराहट होती,                          तेज़ धड़कता जाता है । ---जब भी कभी सिर ऊपर करके,                         तुमको मैं देखा करती हूँ । अधरों पर मु्स्कान देखकर,                         मैं भी...

राधा-मीरा(आध्यात्मिक)-177

राधा-मीरा लल्ला-राबिया,                     कितनों ने तुझे पुकारा है । जँगल-जँगल उन्हें घुमाकर,                    कितना उन्हें भटकाया है । --याद में तेरी रो-रोकर वो,                   रात बिताया करती थीं । तेरे भरोसे छोड़के सबको,                 गीत प्यार के गाती थीं । --प्यार की टीस..तुम क्या जानो,                  केवल विरह दिया सबको । अपनी बातें याद दिलाकर,                  कितना तड़पाया सबको । --ऐसी लगन लगाता क्यूँ है,                  जब निभा नहीं पाता है तू । घुमा प्रेम की वादी में फिर,                  विरह की आग लगाता तू । --सच्चा अब तो कर दो वादा,                    छोड...

दिले शायरी-8

--भीड़ कुछ छँटी थी कि दूसरी लग गई     विचारों की इस तरह इक झड़ी लग गई -- कौन मुझे मुआफ़ करे   मैं भी किसको मुआफ़ करूँ    सभी तो मेरे अपने हैं फिर    किस-किस की मैं बात करूँ --हर रोज़ तेर...

ऑखिन देखी(आध्यात्मिक)-178

पड़ोस में रहने वाली एक सहेली ना जाने किसने उसके कानों में  दूसरी पक्की सहेली के ख़िलाफ़  ज़हर भर दिया ना जाने क्या कहकर आना जाना तो बन्द हुआ ही बोलचाल भी लगभग बन्द ही हो गई पहली सहेली के घर वाले भी दूसरी सहेली से नफ़रत करने लगे काफ़ी सालों बाद अचानक ही पहली सहेली की मौत हो गई अब वो बार-बार स्वप्न में  आने लगी दूसरी सहेली के... प्यार से बार-बार घर पर बुलाने लगी दूसरी सहेली समझ नहीं पा रही थी कि अब इसे क्या हो गया जीते जी पूछा नहीं  मरने के बाद में ये दशा.. आख़िर एक दिन दूसरी सहेली पहली सहेली के घर वालों से मिलने पहुँच ही गई उनके घर--लेकिन ये क्या.. माहौल तो पहले जैसा ही है अब केवल वो ही नहीं है बाक़ी सब कुछ वैसा ही है चिन्ता सी सताने लगी है...उस सहेली को कि यदि...मैं ज़िन्दा रही तो ये सभी मरने के बाद सूक्ष्म शरीर से  फिर मिलने आयेंगे मुझसे और यदि मैं पहले मर गई तो क्या सबसे...ऊपर जाकर मिलना पड़ेगा स्वर्ग में या फिर नर्क में  क्यों कि नफ़रत की दीवार अभी तक गिरी नहीं है इन लोगों के मन से मरने के बाद पश्चात्ताप होगा तो फिर मिलेंगे सहेली की तरह बार-बार इसीलिये क...

माफ़ करना आ जाये(आध्यात्मिक)-179

किसी के गुनाहों को देखना किसी का भी हक़ नहीं  किसी के दोषों को गिनाना किसी भी सूरत में अच्छा नहीं  किसी के बारे में निर्णय पर पहुँचना भला....हमारी क्या है औक़ात  निर्णय ऊपर वाले पर छोड़ना हमारे बस के भीतर की है बात जिनसे दिल दुखा हो..... उन्हें माफ़ करना भी..... बहुत बड़ी हिम्मत की है बात लेकिन....करना होगा माफ़  नहीं तो फिर वही नफ़रत की दीवार अगले जन्मों तक मिलती ही रहेगी जब भी मिलेंगे अगले जन्मों में  या तो ऑंखें चुराते हुये या फिर ऑंखें दिखाते हुये                    💔💔🖤💔💔

विरह की आग(आध्यात्मिक)-180

विरह की आग और विरह का प्याला,                    क्यूँ मुझको आज पिलाते हो । मेरे कन्हैया मुझ पर अपनी,                     ये कैसी धौंस जमाते हो । --माना प्यार किया तुमने भी,                  ख़ूब वफ़ा दिखलाई थी । लेकिन छोड़ गये जब मुझको,                   तब तो दया न आई थी । --याद तुम्हारी कर-करके मैं,                  हरपल ख़्वाबों में रहती हूँ इस मन को कितना समझाऊँ,                  कैसे भी ना धीरज धरती हूँ । --जग हँसाई किया करे अब,                   मैं तो हूँ पगला ही गई । दुनिया लगी काम में अपने,                  खा-पीकर सब मस्त हुई । --तेरी याद और प्रेम के प्याले,                ...

भगवान(आध्यात्मिक)-181

चित्र
कहते हैं भगवान तक केवल भाव ही पहुँचा करता है तभी तो वो शबरी के झूठे बेर भी खा जाया करता है भावनाओं में अपनी बना लिया  जाये क्यूँ ना एक छोटा सा मन्दिर कहा था तुमने कभी बहुत पहले मुझसे कि मैं कहीं दूर नहीं इस दिल में ही रहा करता हूँ🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

गुरुवर आप हमेशा(आध्यात्मिक)-182

गुरुवर आप हमेशा से कहते मेरे लिये समय निकालो तुम पीड़ा और पतन निवारण का कुछ तो ये काम कराओ तुम --घर-परिवार,दोस्त औ दुनिया सबके लिये समय देते हो तुम गुरु के लिये समय न कहकर कल पर क्यों टाल देते हो तुम --मैं-तेरा,तू-मेरी कहकर ही सब  लोग रचा लेते हैं आपस में शादी बाद में बच्चों को ले लेकर क्यों  लड़ते-झगड़ते हैं-करते हैं बर्बादी --सब कुछ छोड़ गुरु पर श्रध्दा हरदम अटल रखा करना तुम भी जो भी करेंगे अच्छा ही करेंगे ऐसा सोचकर रहो ख़ुश भी चिन्ता को तुम दूर भगा दो  सब कुछ तो वही संभालेंगे कितना सदुपदेश दिया था प्यार किया था कितना तुमने                    10/12/10                    👣🙏🏻

मातायें अपने बच्चों को(आध्यात्मिक)-184

मातायें अपने बच्चों को,                   जब लाड़ लड़ाया करती हैं । मेरे लाला,मेरे कान्हा तब,                  कहके बुलाया करती हैं । --लेकिन मेरे दाता मैं भी,                  तुमको क्या कह जाती हूँ । प्यारे तो तुम भी मेरे हो,                   मेरे कन्हैया कह जाती हूँ । --तुमने मुझको क्या-क्या सिखलाया,                 अब भी सिखलाते जाते हो । कैसे बतलाऊँ प्यारे तुम मुझको,                   क्या-क्या नाम दिये जाते हो । --नाम दिये तुमने जितने हैं,                    वो सब मैं सोचा करती हूँ । याद उन्हें कर-करके मैं,                    तब खूब हँसा ही करती हूँ । --तेरे नाम का दिया औ बाती,             ...

भारत माता का भाल(आध्यात्मिक)-19

प्यार आपका सँबल है,              हम सबको राह दिखाता है । जब भी भटकन होती गुरुवर ,             भटकन को दूर हटाता है । मॉ ने उँगली थामी थी तब,              तुमने कँधे बिठाया था । बहुत दूर तक पहुँचाकर ,              तुमने सँसार दिखाया था । कक्षायें सब पार कराईं ,               प्यार का सँबल दे देकर । जब-जब मन में पीड़ा आई ,                  देवदूत भेजे घर पर । "अपनी" का सँबोधन देकर ,                  अपनेपन से थाम लिया । गुरुमाता ने प्यार से मुझको ,                    प्यारा सा यह नाम दिया । मुझे ही नहीं तुम सब बच्चों पर,                   अपना प्यार लुटाते हो । "विचार क्रान्ति अभियान" के ज़रिये ,             ...

दिले शायरी-6

__वो अँधेरी रात मुझे बड़ी सुहानी लगती है चिराग़ जो जला देते हो दिल में मेरे आकर __आरज़ू तेरी और ख़्वाब भी तेरे हमेशा बना रहे सभी कुछ दिल के अरमानों का क्या जब पास मेरे दिल ही नही...

जिन पर तू रहमत बरसाता(आध्यात्मिक)-183

जिन पर तू रहमत बरसाता,           दर्द भी उनको दिया करता है । शायद इसीलिये तो प्यारे,           तू मुझको प्यार किया करता है । --सब कहते है तेरे दर पर,           ख़ुशियों का आलम रहता है । उन ख़ुशियों के आलम से,            ख़ुशियाँ तू बॉटा करता है । --तेरे प्यार और विरह की गाथा,              अब तक सबने ही गाई है । साथ में जुड़ा रहा तू जिससे,               उसने जगकर रात बिताई है । --नींद कहॉ ऑखों में उसकी,               तू ही तू दीखा करता है । घुटने टिकाकर हाथ उठाकर,               वो दुआयें मॉगा करता है । --तेरे चाहने वालों की परछाईं,              पड़ जाये जो सूखी डालों पर । तेरे करम से ख़ुशहाली हो,                दुनिया के ज़र्रे-ज़र्रे पर ।     ...

नारी की सच्चाई(सामाजिक)-186

चित्र
--आवारा की तरह घूमती रहती हो --ये कपड़े क्या पहन रखे हैं उतारो इनको --शाम होने से पहले जल्दी घर लौट आना --बदज़ुबानी मत किया करो --पराये घर जाकर नाक कटाएगी --ज़्यादा पढ़ा-लिखाकर क्या करेंगे --बाद में तो चूल्हा-चौका ही संभालना है न --लड़कों से दोस्ती अच्छी नहीं होती --सीना तानकर क्यों चलती हो --सिर को झुकाकर चलना सीखो सोचती हूँ ऐसी बहुत सी बातें  हमारा समाज लड़कों को भी क्यों नहीं सिखाता......जैसे --अपने से बड़ों को सम्मान देना सीखो --लड़कियों की इज़्ज़त करना सीखो --बेटी भी उतनी ही आज़ाद है जितना तुम --अपने पैरों पर खड़ा होना सीखो --घर के कामों में हाथ बटाना सीखो --अपनी ग़लती मानना सीखो --चीख़ना चिल्लाना बन्द करो --ससुराल वालों को सताना बन्द करो --भिखारी हो क्या...जो दहेज लोगे  मेरी गुज़ारिश है कि अगर नारी सम्मान की बातें की जाती हैं तो व्यवहार में भी समानता लानी ही होगी।

नारी दिवस(सामाजिक)-187

चित्र
तारीफ़ों के पुल बॉध-बॉध कर सबने तुझको खूब रिझाया है लेकिन आज भी सोच-सोच कर मेरा मन अब भी क्यूँ घबराया है कब तक दो राहों पर इसी  तरह से खड़ी रहेगी नारी शादी से पहले पिता का घर शादी हो गई पति का घर पहले भाई पीकर आता था  अब पति भी पीकर आता है वहॉ भी ग़ुस्सा झेला करती यहॉ भी पिटाई पड़ जाती है ज़्यादा बच्चे उसकी ग़लती  बच्चे ना हों बॉझ है बनती कमा-कमाकर पेट है भरती फिर भी......वो घर पति का घर कहलाता है कब तक दर्द सहेगी नारी मुझको समझ न आता है

ऑखिन देखी(व्यक्तिगत)-188

साल भर बाद उसने जब देखा तो दौड़कर पास आया बार-बार निगाहों से जैसे पूँछ रहा हो कि कहॉ थीं अब तक चढ़ने लगा प्यार में ऊपर की ओर चूमने प्यार करने के लिये मैं हँसकर प्यार से सिर को  सहलाती रही रोकती रही उसको इतने में पति चिल्लाये-हटाओ इसको क्या बेबकूफी है मैंने कहा....अरे क्यों हटाते हो इसको कितना वफ़ादार है कि भूला भी नहीं  ये कोई स्ट्रीटडॉग नहीं  कोई रिश्तेदार है पुराना तभी तो भागा आया है प्यार करने के लिये            💔💔🖤💔💔

ऑखिन देखी(सामाजिक)-189

बड़े शहर के बड़े विभाग के बड़े अफ़सर पति-पत्नी दोनों ही अब काफ़ी समय से रिटायर हैं बहुत बूढ़े हो गये हैं दोनों ही चार बेटियाँ शादीशुदा  बेटा नहीं एक भी ख़ुद के फ़्लैट में अकेले रहते हैं याददाश्त चली गई है दोनों की कामवालियॉ जो आतीं थीं काम पर सोसायटी मेम्बरान से शिकायत की अब काम नहीं कर सकतीं पूरा घर गन्दा पड़ा है, आन्टी अँकल को होश नहीं ख़ुद का भी चारों बेटियों को बुलाया गया सलाह मशविरा हुआ कोई न तो साथ ले जाने को तैयार और न ही कोई केयरटेकर रखेंगी आख़िर फ़ैसला बड़ी ने ही लिया  समझदारी से अनाथाश्रम में डाल दिया मॉ-बाप को प्रॉपर्टी बेचकर पैसा चारों ने बॉट लिया चली गईं अपने-अपने घर कामवाली मुझे एक कोरी साड़ी दिखाकर रोती हुई कहती है-आन्टी बहुत अच्छी थीं उन्होंने ही मुझे दी थी जब होश में थीं आज कहॉ हैं-कैसी हैं-कैसे पता करूँ ? बताओ ना आन्टी-आप ढूँढकर  दर्शन करा दो न उनके मैं सोचने पर मजबूर हो गई कि क्या.....बेटियाँ....ऐसा भी कर सकती हैं..... मॉ और बाप के साथ ?                        💔💔🖤💔💔

ऑखिन देखी(सामाजिक)-190

एक ही चिराग है केवल उस घर में वह भी बग़ावत पै उतारू है कहता है अकेला वारिस हूँ तुम्हारा वसीयत क्यों नहीं कर देते अभी मॉ से कराकर ज़बरन चैक पर साइन लाखों रुपये निकालकर कहता है बोल क्या कर लिया तूने....? कल ही मॉ ने दम तोड़ दिया दम क्या....? भरोसा जो टूटा था उसका बाप दम तोड़ने की दहलीज़ पर खड़ा है बेटा जायदाद नाम कराने पै अड़ा है पता है आगे और पीछे भी  है सभी उसी के लिये धन कमाने की दौड़ में  सारे बाक़ी रिश्ते कहीं दूर छूट गये जिस बेटे की ख़ातिर रिश्तों को  सबसे तोड़ा था आज वही इकलौता वारिस तोड़ रहा है उन्हें  जानता है चन्द दिनों के मेहमान हैं ये भी लेकिन वक़्त से पहले  दुनिया से चले जाने को बोल रहा है वो भी तभी तो उसको.. पैसा व जायदाद चाहिये मॉ-बाप नहीं          💔💔🖤💔💔

गुरु के हाथों की कठपुतली(आध्यात्मिक)-191

गुरु के हाथों की कठपुतली, गुरु ही मुझको चलाते हैं । लेकिन जीव समझ ना पाता, कैसे वो धागा घुमाते हैं । ख़ुद को कर्ता मानता है वो, रोता और चिल्लाता है वो । कर्तापन के अंहकार में, फँसता ही जाता है वो । दाता बनकर पुण्य कमाकर, कैसे अंहकार में जीता है । पाप कर्म का शोक मनाकर, बन्धन में वो बँधता जाता है । कितनी शुध्द स्वरूप आत्मा, कितना वो रोती बिलखती है । पाप-पुण्य के संस्कार डालकर, हमेशा लेन-देन में वो फँसती है । जो होना है होकर ही रहेगा, उसको कौन टाल सकता है । तुम ख़ुश रहो गुरुकृपा पर केवल, वो ही तुम्हें बचा सकता है । .............केवल वही बचा सकता है । ...................बँधन मुक्त करा सकता है ।                               👣🙏🏻

जो भी मन में आता है(आध्यात्मिक)-192

जो भी मन में आता है वो,                बात किये जाती हूँ मैं । बातें क्या-क्या की जाती हैं,                समझ नहीं पाती हूँ मैं । -कभी तो लगता अनुशासन में,                   रहना नहीं आता मुझको । आकाश में उड़ते पँछी की क्या,                   मर्यादा है ये भान है मुझको । -बातों को दिल से छू जाने पर,                   अक्सर ही रो जाया करती हूँ । तुम तो कहते अतिभावुक,                    होने से रोया करती हूँ । -ग़ुस्सा होने पर वाणी से मैं,                   ज़हर ही उगला करती हूँ । तुम कहते डँसने से बेहतर,                    ज़हर उगलना अच्छा है । -सामने बतला देने पर जो,                   ...

गुरुवर मेरे तुम कहते हो(आध्यात्मिक)-193

गुरुवर मेरे तुम कहते हो,                देना-देना सिर्फ़ ही देना । तुम्हें चाहिये जो कुछ भी,               वह सबको देते ही रहना । अन्न चाहिये अन्न ही देना,               धन चाहिये धन बॉटो । जो-जो कुछ भी तुम्हें चाहिये,               पहले बॉटो फिर मॉगो । केवल-केवल मॉगते रहते,                यही तो सब भी करते हैं । पहले कभी न बॉटकर आये,                 अब वो ही मॉगा करते हैं । हमने तो पहले तुम सबको,                 बोना-काटना सिखाया है । फिर भी तुमको समझ न आती,                      जो सिद्धान्त बताया है । बोओ और काटो यही विधा है,                     अच्छा जीवन जीने की । जिस दिन तुम्हें समझ आयेगी,         ...

आओ कन्हैया मेरे दाता(आध्यात्मिक)-194

आओ कन्हैया मेरे दाता तुमको आज बुलाती हूँ  भोग बने हैं तरह-तरह के अपने हाथों तुम्हें खिलाती हूँ खाने के शौक़ीन बहुत तुम कितना कुछ तुमने सिखलाया जो भी कमियॉ खाने में होती बड़े प्यार से तुमने बतलाया जो भी भोग लगाने आता वो ही भोग लगा लेते लाने वाला ख़ुश हो जाता तुम भक्ति भाव बढ़ा देते मेरे कन्हैया तुमको अभी भी सबको ख़ुश रखने की आदत है रूखा-सूखा भी भोग लगाकर पूरी करते भक्तों की चाहत है तुम्हारे सामने कह ना पाती मैं तुम्हें खिलाते डरती हूँ सबको खिलाने के शौक़ीन कन्हैया तेरी इसी अदा पर मरती हूँ                 👣🙏🏻

ऑखिन देखी(आध्यात्मिक)-195

एक बहन जिसने बचपन से भगवान को अपना भाई माना था पड़ोसन ने उससे पूछा आज तो भाईदौज है  तेरा भी भाई आयेगा न ? सुनते ही उदास होकर बोली भाई तो ताक़त होता है बहन की भाई छोटा हो या बड़ा जान होता है बहन की भाई जब दुखी होता है.... बहन की रुलाई फूट पड़ती है भगवान से वो पीहर की ख़ुशियाँ ही मॉगती है और भी बहुत सी बातें हैं  भाई-बहन के प्यार की,लेकिन... अब ख़ून के रिश्तों से ज़्यादा  मुँहबोले रिश्ते ज़्यादा अहमियत रखते हैं मॉ-बाप से तो बेटों को रुपया और जायदाद मिलती है या ज़बरन छीन ली जाती है बहन के पास क्या है देने को हॉ ये बात अलग है कि कुछ बेटियाँ भी मॉ-बाप से अपना हक़ ले लेती हैं ज़बरन या प्यार से मैं उनमें से नहीं .... मेरा भगवान ही मेरा भाई है  बचपन से अब तक भाई के सारे काम उसी ने किये हैं  भाई ज़रूरत पड़ने पर कभी नहीं आया पीहर मॉ-बाप के सामने ही होता है...दीदी हो सकता है आपका भाई आपको बहुत प्यार करता होगा.... मेरे साथ तो ऐसा कभी हुआ नहीं  अच्छा चलती हूँ मेरे भाई के लिये  भोजन तैयार करना है वो आयेगा अभी पर क्या करूँ वो आपको नहीं दिखेगा शर्मीला है या पता नहीं क...

सृष्टि खेलती राग रँगों से(आध्यात्मिक)-196

सृष्टि खेलती राग-रँगों से,                   फागुन में खेल ये खूब होता है । रँग-बिरँगी ओढ़ चुनरिया,                    धरती का मन भी डोला करता है । जीवों के भीतर राग-रागिनी,                       नव सँगीत गुन्जाते हैं । भीतर के सँगीत की लहरें,                     उत्सव के रूप में आते हैं । रँगों का ये पर्व है होली,                   हर इँसान रँगा है रँग में । दुनिया के इस रँग-मँच पर,                 अपनी अदायें करते हैं । कलर-थैरेपी करके भी हम,                    रँगों से जुड़ते जाते हैं । तरह-तरह के रँगों को हम,                    अपने जीवन में अपनाते हैं ।               ...

आज छकाकर पिला दो(आध्यात्मिक)-197

आज छकाकर पिला दो इतनी,                     होली मुझको याद रहे । नशा चढ़े जो तेरा मुझपै,                       तेरी जैसी चाल रहे । रँग-बिरंगे फूलों से तुम,                  मुझको तो इतना नहला दो । दिल के अन्दर गहरे बैठे,                  होली खेले आज दिखा दो । तेरी याद और तेरे नशे में,                     मैं तो पीती जाउँगी । प्रेम का प्याला पी-पीकर,                    मैं पागल ही हो जाउँगी । मीरा-राधा जैसे खेलीं,                   वैसी होली आज खिला दो । मेरे मन के मीत मुझे तुम,                   अपना सारा राज बता दो । लहराती-बलखाती जब मैं ,                    ...