होली गीत -420

मन खेले मेरा होली "तुम संग"
खेले मेरा मन होली
मात-पिता के घर में आकर
अपने ऊपर नित इठलाकर
खेलूं सब संग होली
मन खेले मेरा होली
पिय घर से मैं निज घर आई
खेल फाग ख़ूब धमाल मचाई
भीतर से बाहर तक रंग गई
खेली चहुं दिशि होली
मन खेले मेरा होली
"गुरु घर" मेरा जनम जनम से
आवत जात रहि कबहु कबहु से
जनिमन से हूं भटकत आई
अब खेलूं गुरु संग होली
मन खेले मेरा होली
                           11/3/22

 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

याद आपकी-428

दृष्टा-425

कर्म -426