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गुरुगीता-106

अघोर सम्प्रदाय के अनन्य आचार्य सन्त कीनाराम का जन्म बनारस के चन्दौली तहसील के अन्तर्गत रामगढ़ ग्राम में क्षत्रिय रघुवंशी परिवार में विक्रमी संवत् १६५८ में, भाद्रपद के ...

गुरुगीता-105

ज्ञानगंज से सिद्धों का आदेश विशुद्धानन्द जी को आ गया था कि तुम अपनी स्वतंत्र शिष्य परम्परा नहीं चलाओगे,जबकि इनके उस काल में ही उनके शिष्य गोपीनाथ कविराज को भी गुरु आज्ञा ह...

गुरुगीता-104

एक आश्रम में एक गुरु और उनके अनेक शिष्य रहते थे। गुरु बहुत वृद्ध हो गए। उनको अपना कोई उत्तराधिकारी निश्चित करना था। उन्होंने सभी शिष्यों को बुलाया औऱ कहा कि मेरे पांच प्रश...

गुरुगीता-103

श्री नामदेव जी महाराष्ट्र के एक सुप्रसिद्ध संत थे। वे विट्ठल भगवान के बहुत बड़े भगत हुए हैं। उनका ध्यान सदा विट्ठल भगवान के दर्शन, भजन और कीर्तन में ही लगा रहता था। सांसार...

गुरुगीता-102

श्रेणिक पुत्र मेघ ने भगवान् बुद्ध से मंत्र दीक्षा ली और उनके साथ ही रहकर तपस्या में लग गए। बिरक्त मन को उपासना से असीम शांति मिलती है। कूड़े से जीवन में मणि- मुक्ता की सी ज्यो...

गुरुगीता-101

भारत के उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में एक योगी, सिद्ध महापुरुष एवं सन्तपुरुष थे देवरहा बाबा. डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद, महामना मदन मोहन मालवीय, पुरुषोत्तमदास टंडन, जैसी विभू...