गायत्री उपासना की शिक्षा मुझे 11 वर्ष की आयु में उस समय मिली जब मेरा यज्ञोपवीत हुआ था। जिस दिन से यह महामन्त्र मुझे मिला उस दिन से लेकर आज पर्यंत मैं पूर्ण श्रद्धा और लग्न के साथ नियमित रूप से इस साधन को करता हुआ चला आ रहा हूँ। गायत्री के अनेक लाभ बताये जाते हैं उनमें से कुछ को मैंने अपने जीवन में प्रत्यक्ष देख लिया है। पहला लाभ जिसका मैंने भली भाँति अनुभव किया है यह कि जिससे साधक की बुद्धि निर्मल एवं कुशाग्र बनती हैं। मैं पढ़ने में सदैव तेज रहा, स्मरण शक्ति और धारणाशक्ति सदैव तेज रही, 25 वर्ष की आयु में मेरी शादी हुई इससे पूर्ण ही आयुर्वेद की परीक्षाएँ उत्तीर्ण कर चुका था। घर की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी, मैं एक अच्छा दवाखाना खोलना चाहता था। घर के लोगों से चर्चा की तो उन्होंने दवाखाना खोलने लायक पैसा जुटाने में असमर्थता प्रकट की। दूसरी कठिनाई यह थी कि इटारसी जैसे नगर में जहाँ बीसों डॉक्टर, वैद्य और अस्पताल मौजूद वहाँ नये एवं छोटे दवा-खाने का चलाना कठिन दिखाई पड़ता था। सब लोग मुझे नौकरी देने की सलाह दे रहे थे। इच्छित व्यवसाय करने का मार्ग रुका हुआ दिखाई पड़ता था। निराशा और चिन्ता स...