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गायत्री साधना के चमत्कार-11

कठिन प्रारब्ध भोगों का कुचक्र ऐसा है जिसे भोगे बिना मनुष्य को छुटकारा नहीं मिलता। दशरथ जी भगवान राम के पिता थे, उनकी मृत्यु पुत्र शोक में अर्त बिलख बिलख कर हुई। इस प्रकार की...

गुरुगीता-54

रूप सिंह बाबा ने अपने गुरु अंगद देव जी की बहुत सेवा की । 20 साल सेवा करते हुए बीत गए। गुरु रूप सिंह जी पर प्रसन्न हुए और कहा मांगो जो माँगना है। रूप सिंह जी बोले गुरुदेव मुझे तो म...

ऑखिन देखी(सामाजिक)-352

आज के दिन ज़्यादातर मॉयें अपने बच्चों के लिए अघोई अष्टमी का त्यौहार मनाती हैं और अपने बेटों के लिए दिन भर भूखे रहकर उनकी लंबी उम्र की कामना करती हैं पति के लिए व्रत, संतान क...

सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-31

बाबू का बन्दियों के प्रति प्यार बढ़ रहा था और कुछ लोगों को ये सब सहन नहीं हो रहा था। ये वे लोग थे, जो बन्दियों पर केवल अपना रौब रखे रहना चाहते थे,सहायता कुछ भी नहीं करते थे। बाहर ...

गुरुगीता-53

वनवास के समय एक बार भगवान श्रीरामचंद्र ने लक्ष्मणजी से कहा "भाई ! एक कुटिया बनाओ।" लक्ष्मण जी ने पूछा :"कहाँ बनाऊँ ? श्रीरामजी ने कहा : जहाँ तुम्हारा मन चाहे,वहाँ बना लो। इतना सु...

गायत्री साधना के चमत्कार-10

गायत्री उपासना की शिक्षा मुझे 11 वर्ष की आयु में उस समय मिली जब मेरा यज्ञोपवीत हुआ था। जिस दिन से यह महामन्त्र मुझे मिला उस दिन से लेकर आज पर्यंत मैं पूर्ण श्रद्धा और लग्न के साथ नियमित रूप से इस साधन को करता हुआ चला आ रहा हूँ। गायत्री के अनेक लाभ बताये जाते हैं उनमें से कुछ को मैंने अपने जीवन में प्रत्यक्ष देख लिया है। पहला लाभ जिसका मैंने भली भाँति अनुभव किया है यह कि जिससे साधक की बुद्धि निर्मल एवं कुशाग्र बनती हैं। मैं पढ़ने में सदैव तेज रहा, स्मरण शक्ति और धारणाशक्ति सदैव तेज रही, 25 वर्ष की आयु में मेरी शादी हुई इससे पूर्ण ही आयुर्वेद की परीक्षाएँ उत्तीर्ण कर चुका था। घर की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी, मैं एक अच्छा दवाखाना खोलना चाहता था। घर के लोगों से चर्चा की तो उन्होंने दवाखाना खोलने लायक पैसा जुटाने में असमर्थता प्रकट की। दूसरी कठिनाई यह थी कि इटारसी जैसे नगर में जहाँ बीसों डॉक्टर, वैद्य और अस्पताल मौजूद वहाँ नये एवं छोटे दवा-खाने का चलाना कठिन दिखाई पड़ता था। सब लोग मुझे नौकरी देने की सलाह दे रहे थे। इच्छित व्यवसाय करने का मार्ग रुका हुआ दिखाई पड़ता था। निराशा और चिन्ता स...

मेरी ये ज़िद-351

मेरी ये जिद नहीं मेरे गले का हार हो जाओ, अकेला छोड़ देना तुम जहाँ बेज़ार हो जाओ। बहुत जल्दी समझ में आने लगते हो ज़माने को, बहुत आसान हो थोड़े बहुत दुश्वार हो जाओ। मुलाकातों के वफ़ा ...

सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-30

इस तरह उस दबंग भाई को अन्य गायत्री साधक बन्दी भाइयों से एक साल तक जप और यज्ञ कराकर गुरुदेव ने क्षत-विक्षिप्त शरीर में भी जान डाल दी। गुरु की कृपा कब और किस रूप में किसके द्वार...

गुरुगीता-52

श्री नामदेव जी महाराष्ट्र के एक सुप्रसिद्ध संत थे। वे विट्ठल भगवान के बहुत बड़े भगत हुए हैं।उनका ध्यान सदा विट्ठल भगवान के दर्शन, भजन और कीर्तन में ही लगा रहता था। सांसारि...

गायत्री साधना के चमत्कार-9

गायत्री का सर्व विदित लाभ यह है कि उससे जन्म जन्मान्तरों के सुसंस्कार मिलते हैं और कुपात्रता दूर होती है। सुसंस्कारी और सत्पात्र होना जीवन का सबसे बड़ा लाभ है। जिसे यह ला...