होली की याद -421
मैंने खेली होली तुम संग थी
मैंने तुम संग....
पहले चरनन गुलाल लगाई
ऊपर से फिर फूल बरसाई
मुख पर चन्दन अबीर लगाई
तुम तो ऐसे सज गये दाता
जैसे सज गये हों रघुराई
मैंने तुम संग.....
हर होली मुझे याद है आती
अंखियां अविरल अश्रु बहाती
रह-रह कर तेरी याद दिलाती
अब तो आ जाओ मेरे दाता
तुम संग खेलुंगी फिर होली
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें