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नशा तुम्हारी याद का(आध्यात्मिक)-198

नशा तुम्हारी याद का नशा तुम्हारे ध्यान का नशा तुम्हारे मन्त्र का नशा तुम्हारे जन्त्र का नशा तुम्हारी चितवन का नशा तुम्हारी सूरत का नशा तुम्हारी लकुटी का नशा तुम्हारी भृकुटि का नशा तुम्हारे चरणों का नशा तुम्हारे कपड़ों का नशा ये मुझ पर चढ़ा रहे प्यार तुम्हारा बना रहे मेरे कन्हैया और क्या मॉगू क्या-क्या मॉगते मैं क्या जानूँ                   👣🙏🏻

दिले शायरी-7

--ख़ुशबू लिये कोई झोंका जो आता है हवा का  ख़बर पहले ही दिये जाते हो कि आ रहे हो तुम.....!! --मेरे शफ़ीक़ हो तुम कोई और कैसे जाने सब ढूँढते हैं तुमको जाने कहॉ-कहॉ!! --महफिलों में तेरी जाना नागवार गुज़रता है मुझको तुम साथ होते हो फिर भी लोग अकेला समझते हैं....!! -- कभी तो आया करो ख़ुशी में साथ-साथ ग़मों का बोझ उठाने हमेशा चले आते हो!! --तुम्हीं में खो जाना     फ़ितरत है मेरी कैसे कहूँ हर वक़्त       ख़यालों में क्यूँ रहते हो !!                           @शशिसंजय 

तुम्हारे काम में लग जाना(आध्यात्मिक)-199

तुम्हारे काम में लग जाना,                   तुम्हारी याद में खो जाना । ऐसी ही कुछ दशा हो गई,                  सामने हर छिन हर पल पाना । तुमसे पूछूँ, तुमको ढूँढूँ,                 बस यही तो बात किया करती हूँ । जैसे भी हो केवल तुमको,                अपने पास रखा करती हूँ । आस-पास में मेरे केवल,                तुम ही तुम तो रहते हो । अन्दर में जब झॉका करती,                 देख के तब तुम हँसते हो । ऑंख मिचौली खेला करते,               तुम भी तो जब मन करता है । मैं भी वही शरारत करती,                जैसे तू भी खेला करता है । ज्ञान नहीं है ध्यान नहीं है,             कुछ भी आता मुझको नहीं है । केवल-केवल तुझे चाहना,         ...

मुर्शिद मेरे होली के दिन(आध्यात्मिक)-200

मुर्शिद मेरे होली के दिन,                 आज बचे हैं दो ही चार । रँगों की बारिश कर देना,                अन्तरंग में बिखरे प्यार । रँगना लाल सुहाग की चुनरी,                 मन मेरा कर देना पीला । प्रीत के चरणों में जाते ही,                 अन्तरमन हो जाये गीला । नीला रँग कान्हा के तन का,                मुझको भी नीला कर देना । देख के सबको मिले शान्ति,                 शान्ति भरा जीवन कर देना । हरे रँग से भर देना तुम,                  मेरे जीवन में हरियाली । ख़ुशहाली भी दे देना तुम,                 बाटती रहूँ ख़ुशियों की थाली । केसरिया रँग से भर देना,                  मेरे जीवन में वैराग्य । राग-द्वेष सब निकल के भागें,   ...

ख़ुश हुये तो क्या हुये(आध्यात्मिक)-201

ख़ुश हुये तो क्या हुये,                 क्यूँ ग़म से घबराया किये । दिल की तह में घुस गये,                 फिर ख़्वाब क्यों आया किये । दूर जाके हमसे क्यूँ फिर,                हरदम याद ही आया किये । पूँछने पर शर्म से वो,                 जाने क्या-क्या कह दिये । मैं तसब्बुर हूँ तुम्हारा,               तुम चाहा ही मुझसे क्या किये । मेरे दिल की धमाल में,                सुर-ताल तुमने क्या किये । सुबह-सुबह किस हाल में,                  तुम फिर मुझे छोड़ा किये । शाम आते ही मुझे फिर,                   मलाल में मिला किये ।                                  👣🙏🏻    ...

तरह-तरह के रँगों से(सामाजिक)-202

तरह-तरह के रँगों को  पानी में जब घोला जाता है जो रँग डाला जाता है  पानी उस रँग का होता है हर रँग के रँग में रँग जाना  पानी की ये फ़ितरत है कैसा करिश्मा पानी का  ये कैसी पानी की क़ुदरत है पानी की तह में कुछ भी डालो  भीतर से वो दिखता है पारदर्शिता देकर वो अपनी  सबको ख़ुश कर देता है ऐसे ही हम सब हो जायें  अच्छे रँगों में ख़ुद ढल जायें भीतर-बाहर एक से रहकर  ख़ूब हँसें और ख़ूब हँसायें छोटा बच्चा फिर बन जायें रूठ के फिर अब्बा हो जायें                      👣🙏🏻

सबकी ख़ुशी में ख़ुश हो जाना(सामाजिक)-203

सबकी ख़ुशी में ख़ुश हो जाना,                          सबके बस की बात नहीं । क्यों कर ना पाते जो ऐसा,                     क्या उनके सिर पर तेरा हाथ नहीं । सबसे बड़ा दुख कुछ लोगों को,                       सामने वाला सुखी क्यों रहता है । केवल इसी धुन के चलते वो,                      हरदम दुख से ही घुटा करता है । सभी सुखी हों इस दुनिया में,                       सब ये ही मंत्र जपा करते हैं । फिर क्यों सुख आ जाने से,                       ईर्ष्या का भाव रखा करते हैं । ऐसी गुरुसत्ता है हम सबकी,                      जिसने प्रेम ही बरसाया है । ऐसे प्रेम की बरसात को हमने, ...

चरणों में तेरे गुलाल लगाना(आध्यात्मिक)-204

चरणों में तेरे गुलाल लगाना,                         अलग ही रंग भर देता है । होली पर तेरे दर पर आना,                        मन को ख़ुश कर देता है । कैसे बताऊँ कैसे सुनाऊँ ,                        होली की ख़ुशहाली को । चरणों में बैठके गाया करते,                          होली के कुछ गानों को । क्या ही रँगत क्या ही शोभा,                          तेरे दर की हुआ करती । क्या भूलूँ क्या याद करूँ मैं,                          वो यादें बहुत आया करतीं । रंग-बिरंगे फूलों से जब तुम,                          पूरे ही ढक जाया करते थे । ...

तेरा नाम आये जुबां पर मेरी(आध्यात्मिक)-205

तेरा नाम आये जुबॉ पर मेरी,                  मगर होंठों पै आके ही वो रह गया । तू चला ही न जाये नज़र से मेरी,                  तुझको जाते हुये देखता रह गया । कुछ तो बोलूँ-बुलाऊँ तुझ...

दिले शायरी-4

 -- चाहा है तुम्हें जब से कुछ फ़िक्र न की ज़माने की        क्या कुछ इल्ज़ामात लगाते रहे हैं वो!! -- तुम्हीं में खो जाना  फ़ितरत है मेरी    कैसे कहूँ हर वक़्त ख़यालों में क्यूँ रहते हो !! --खाक में तब्दील एक दिन हो ही जाना है  जल रहा है चिराग़ तब तक तो जलने दो !! --तुमसे मेरा याराना बड़ा वजनी हो जाता है    बाक़ी के रिश्ते बड़े हल्के हुआ करते हैं!! --ऐसा कोई रँग लगा दो मन मेरा बच्चा बन जाये    छोटे बच्चे सा दिल हो जाये !! --और क्या ख़्वाब देखूँ तेरी रहगुजर में रहने के      ये जिन्दगी संवर जाये चरणों की धूल से तेरे!!                                         @शशिसंजय 

ब्रज की होली(आध्यात्मिक)-185

ब्रज की होली मस्ती की होली,                  लठा मार हुआ करती है । गोपियॉ कृष्ण सँग खेलें होली,                  ऐसी होली हुआ करती है । रँग-बिरंगी लहरियॉ मेरी,                  ऑखों के आगे नाचा करती हैं । इन्द्र धनुष की छाया मेरे,                   दिलो दिमाग़ पर आ पड़ती है । मेरा दामन तरह-तरह के,                   रँगों से भर जाया करता है । तभी तो मेरा अँगना प्यारे,                   तेरी ही राह तका करता है । होली का त्यौहार ही ऐसा,                  अपना जैसा ही लगता है । तुम आओ या ना आओ प्यारे,                 दिल तो तुम्हीं में लगा रहता है । आ जाते तो अच्छा होता,         ...

मेरी एक दोस्त(सामाजिक)-207

मेरी एक दोस्त मुझे अक्सर ही कहा करती थी आगे बढ़ना है... तो दिखावा भी करना सीखो मतलब से ही सही संबंध बनाना सीखो आजकल लोगों को दिखावा ही अच्छा लगता है सीधे-सादे रहना किसी को भी न...

गुरुवर कहती बार-बार हूँ(आध्यात्मिक)-208

गुरुवर कहती बार-बार हूँ,               मैं-मैं ख़त्म न होती क्यूँ है । बार-बार कर्ता होने का मेरे,              भाव हमेशा उठता ही क्यूँ है । क्या करूँ मैं प्यारे दाता,           ...

आंखन देखी(सामाजिक)-222

ऑखन देखी ---------- एक दिन बहुत उदास सी बच्ची मुझसे कहने लगी आन्टी मेरे ससुर बहुत अच्छे हैं सास...नहीं मैं सोचने पर मजबूर हो गई आख़िर.....ऐसा क्यों ? औरत ही औरत की दुश्मन क्यों है ? सास-बहू क...

गुरु चरणों की गाथाएं(आध्यात्मिक)-229

गुरू चरणों की गाथायें,                 मैं कब से सुनती आई हूँ । जब से चरण में तेरे बैठी,                  क्या-क्या गुण मैं पाई हूँ । चरणों में सजदा करने का,                  भाव ...

आंखन देखी(सामाजिक)-224

कभी-कभी मेरे मन में ख़याल आता है नहीं रहेगी जब दुनिया में एक भी नारी नहीं रहेगी मॉ की ममता बहनों का प्यार बेटियों का दुलार प्रेमिका की गुहार पत्नी का कर्कशता जैसा पुरुष बय...

आंखन देखी(सामाजिक)-221

काम वाली बाई का बेटा दूर हॉस्टल में पढ़ता है बेटियाँ दो हैं जो घर पर ही रहती हैं बेटा बुढ़ापे का सहारा है ये सोचकर पढ़ाती है आगे का सोचकर वर्तमान को घिसे जाती है कितना ही समझ...

रंग-बिरंगे फूलों से दाता(आध्यात्मिक)-230

रंग-बिरंगे फूलों से दाता,            तुमको नहलाया करते हैं । इसी तरह कुछ अपनी होली,            सब साथ मनाया करते हैं । फागुन आते ही मेरे मन में,             सब रंग अँगड़ाइयॉ लेत...

आंखन देखी(सामाजिक)-223

दो दिन पहले कुछ लोगों का,                 प्यार का दिन आया था । ख़ुशी-ख़ुशी उस दिन कुछ ने क्या.,                पूरी दुनिया ने इसे मनाया था । कुछ ने तो तरह-तरह के,                गि...

आंखन देखी(सामाजिक)-226

काफ़ी दिनों से एक चुटकुला बराबर watsapp पर आ रहा था । भाई 14तारीख को क्या है? जबाब में- कुँवारे हो तो वैलेण्टाइन डे शादी शुदा हो तो शिवरात्रि मनाना भाई ये कैसा मज़ाक़ है महिलाओं पर प...

गुरु के चरणों में मां की शरण में(आध्यात्मिक)-231

गुरु के चरणों में,मॉ की शरण में,                   जो बालक आ जाता है । दोनों का ही कृपा पात्र वो,                   सब कुछ करता जाता है । उनकी करुणा की अविरल धारा,                 ...

खुशियाँ का कोई वक्त नहीं है(सामाजिक)-232

ख़ुशियों का कोई वक़्त नहीं है,             ख़ुशियाँ हर पल में होती हैं । सुख और दुख में साथ ही रहतीं,              हर दिन को गीला करती हैं । हम ही बाबरे हो जाते हैं,               ...

धुंधली यादेंआध्यात्मिक)-217

भूली बिसरी सब यादों का, एक साथ पिटारा आ जाता । कितनी सुन्दर यादों को लेकर, वो साथ मेरे लग ही जाता ।             जब शरण में तेरी आई थी,             वो नादानी और बचपन था ।             ...

होली का उत्साह आज फिर(व्यक्तिगत)-233

होली का उत्साह आज फिर,            कैसा बसन्त ले आया है । चिड़ियायें चहचहा उठी हैं,           चारों तरफ़ ही जोश छाया है । घर की छत पर दाना चुगने,            कुछेक कबूतर आ जाते हैं ...

धुंधली यादें(व्यक्तिगत)-220

छोटे शरारती बच्चों का उछलना कूदना देखकर लौटा लाता है फिर से वही पुराना बालमन-वही शरारतें इस ढलती काया में कोई बच्चा फिर से जी उठता है-कहता है चढ़ जा पेड़ पर,अरे खेल न कँचे दे...

शिव ही गुरु हैं, गुरु ही शिव हैं(आध्यात्मिक)-106

शिव ही गुरु हैं,गुरु ही शिव हैं इस झँझट में कौन पड़े सारे झँझट ही जो मिटा दे सही में शँकर उन्हीं को कहते जगह-जगह मूरतिया तेरी सभी तुम्हें नहलाते हैं श्रद्धा भाव से दूध, गंगाज...

दिल के भीतर(आध्यात्मिक)-234

दिल के भीतर एक छोटा दिल है,            ना जाने क्या-क्या कहता है । पता है वो तुम्हें किसका दिल है,            जो बातें किया ही करता है । जो बक-बक करता,मेरा दिल है,              तुम त...

साथी साथ निभाना(पारिवारिक)-235

कितनी जल्दी बीत गये ये,          जीवन के अब छियासठ साल । जोड़ के देखो तो लगते हो,               केवल उमर है बारह साल । वही बोलना,वही उछलना,                दिन भर मस्ती करते रहना । ...

धुंधली यादें(आध्यात्मिक)-219

गुज़रे तुम्हारे साथ जो लम्हे,                  यादें आज भी बाक़ी है । सूफ़ियाना महफ़िलों का लगना,                 मँजर की यादें ताज़ी हैं । मेरे मुर्शिद..तेरे क़दमों में,    ...

कैसे-कैसे चक्र घुमाकर(आध्यात्मिक)-236

कैसे-कैसे चक्र घुमाकर,                   तुम रहते हो घर के भीतर । तरह-तरह के रंग दिखाकर,                   महकते हो काया के भीतर । कभी केसरी रंग का बाना,                  पहने ख़...

पल-पल में जो राह दिखाये(आध्यात्मिक)-237

पल-पल में जो राह दिखाये,                  ऐसी ताक़त तेरी है । बिगड़ी बातों को सँभलाये,                  ऐसी मुहब्बत तेरी है । तुम को कौन सा काम है प्यारे,                दिन भर ध...