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दृष्टा-425

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दृष्टा बनकर देखो पहले  बुरे विचार मन में ना लाओ करता है सब करने वाला ईश्वर पर विश्वास जमाओ मैं-मैं अपनी दूर भगाकर  देखो उसके खेल निराले अच्छा-बुरा करने वालों के वे ही हैं सबके रखवाले कौन किसी को क्या दे सकता ? ईश्वर ही सब देने वाले  उम्मीद किसी से क्यों करना  जब कर ही दिया सब उनके हवाले सबको अच्छा सोचा कर तू सब ही अच्छे लगने लगेंगे तेरे दु:खों-तेरे कष्टों को केवल गुरुवर ही दूर करेंगे वे ही सारे कष्ट करेंगे !!

शुकराना -424

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शुकराना तेरा है प्रीतम तूने मुझको गले लगाया प्यार की छांव में मुझे बिठाकर तूने अमृत पान कराया छककर अमृत पीता रहा मैं प्याला खाली होता गया ना जाने बिन देखे कैसे तू भी प्याला भरता गया जब-जब मुझको लगता ऐसे रीता होता जाता है सब तब अनदेखे अनजाने ही सब औकात से ज़ियादा देता गया शुकराना... शुकराना प्रीतम प्रेम प्याला पिलाता गया मुझको अपना बनाता गया !!