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दिसंबर, 2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

साल पुराना जा रहा(आध्यात्मिक)-327

"साल पुराना जा रहा, नया आगमन होय।           बीती ताहि बिसारि के,आगे की सुधि लेय" बीता भूल नहीं पाते ,        तुमने सदबुध्दि का मंत्र दिया। बातें समझ नहीं पड़तीं,         दुर्बुध...

नाव में तेरी(आध्यात्मिक)-326

नाव में तेरी बैठ के दाता,                 मुझको ख़ूब मज़ा आता है। हिचकोले खाती नैया पर,                  तुझपै भरोसा दृढ़ होता है। ऊबड़ खाबड़, उथला पानी,                   लहर...

मेरे दाता काम नहीं कुछ(आध्यात्मिक)-325

मेरे दाता काम नहीं कुछ,           फिर भी व्यस्त मैं रहती हूँ। तेरे ख़्याल में हरपल रहकर,            तुझको खोजा करती हूँ। साथ में रहकर भी मुझको तुम ,             ख़ूब छकाया करते ...

दाता तेरी करुणा(आध्यात्मिक)-324

दाता तेरी करूणा के झरने,                     लगातार बहते रहते हैं। इन झरनों की मस्ती में हम ,                      ख़ूब नहाया करते हैं ।     आशीर्वाद की मुद्रा तेरी,           ...

तेरी सूरत(आध्यात्मिक)-322

तेरी सूरत, तेरी सीरत, सब कुछ मन को भाती है। करूणा तेरी अपार है दाता, हरपल मिलती जाती है। तेरा हौसला, तेरी ताकत, तेरा ज्ञान जो तूने दिया। सब कुछ तुझ पर ही  वारी है, जितना प्यार भी ...

प्रीतम ध्यान(आध्यात्मिक)-321

प्रीतम ध्यान तुम्हारा करते,                      तुम्हें सामने पाते हैं।        अधरों पर मुस्कान लिए तुम,                       हमको खूब लुभाते हो। सिर से नख तक देखा करती,  ...

गुरु चरणों में(आध्यात्मिक)-323

गुरु चरणों में सिर को रखकर,                   सारा भार उतर जाता है। तिरछी चितवन डालते ही बस,                      सारा प्यार उमड़ जाता है। हरदम आपकी कृपा बरसती,               ...

बच्चों के मन को पहचाने(214)

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बच्चों के मन को पहचाने, ऐसी प्यारी होती मां। प्यार भरी जो डांट लगाये, खूब निराली होती मां। दिल से सबको लाड़ लड़ाती, भीतर चिन्तित होती मां। सिर पर प्यार से हाथ फिराती, ढेर दुआयें देतीं मां। जब तक लौट न घर को आयें, सजदे में रहती है मां। खुशहाली की मन्नत करती, घर में दीप जलाती मां। तमाम गुनाह माफ कर देती, फिर से धीरज धरती मां।। गुस्से में जब आ जाती तो, फूट - फूट रो देती मां। कितनी बुलन्दी छूं लें फिर भी, गोदी तेरी ऊँची मां। गोदी में जब तू ले लेती, आसमान हम छूते मां। मां तुमको बचपन में खोया, प्यार तलाशा हर पल मां। माताजी के रूप में मिली हैं, मुझको मेरी प्यारी मां। सब बच्चों पर प्यार लुटाती, सबका ध्यान है रखती मां। पल - पल में अहसास कराती, हूँ मैं सबके पास यहाँ। मां हम बच्चे बड़े न होंगे, प्यार तुम्हारा मिलता रहे। सब मांओं को शरण में लेना, जो - जो दूर हुई हमसे।                                                 17/12/17

जब छाने लगा(आध्यात्मिक)-320

जब छाने लगा अंधेरा था,       जब अपनों ने ही घेरा था।                तब तुमने आकर ही दाता,                     मझधार से मुझे निकाला था। -कैसे कहूँ गुरुवर तुम्हारे,       प्रेम की ...

आंखन देखी(आध्यात्मिक)-227

कर्मों की जब ओढ़ चुनरिया, दाता के घर जाऊँगी। ना जाने क्या-क्या कर बैठी, ये सब उन्हें बताऊँगी। _वो सब जानें वो सब बूझें, फिर भी सुन मुस्कायेंगे।   प्यार से सिर पर हाथ रखेंगे, थोड...

आ जाओ मेरे दाता(आध्यात्मिक)-319

आ जाओ मेरे दाता, मेरी रूह में समाओ. भीतर में जब भी देखूं, जलवा(दर्शन) मुझे दिखाओ. -खाली पड़ा है घर(शरीर) तो, प्यारे बिना तुम्हारे. मैंने सुना है तुम भी, रहते हो साथ हमारे। -कैसे मैं ...

खुशियों का अम्बार(आध्यात्मिक)-318

खुशियों का अम्बार लगा है, दाता तेरे डेरे में, लूट-लूट कर खुशियां लाये, दाता तेरे मेले में, -भर - भर झोली मिला है सबको, जो गये तेरे मेले में,   घर बैठे भी वारिश हो गई, ना जा पाये जो मेल...

दिले शायरी -3

--हाथों में पत्थर नहीं, फिर भी चोट देती है,          ये जुबान भी अजीब है.....…                अच्छे-अच्छों के.......          घर (दिल) तोड़ देती है. --- लोगों ने दिया तो सुनाया भी बहुत कुछ,       म...

तुम ही खुदा हो मेरे(आध्यात्मिक)-317

तुम ही खुदा हो मेरे, दाता तुम्हीं हो मेरे। मैं क्यों किसी को देखूं, तुम हो खिवैया मेरे।      जब ढूंढती हूँ तुमको, दिखते कहीं नहीं हो।      अन्दर से मुस्कुराते, तुम पास ही हो मे...