मन तो तुम्हारे पास है दाता, तन भी तो काम नहीं करता । धन भी तो साथ नहीं जाना है । कुछ भी तो समझ नहीं पड़ता । पद,प्रतिष्ठा,रुपया,पैसा, सब इसमें ही उलझे रहते । क...
पल में हँसना,पल में रोना, ऐसा क्यों..हो जाया करता है । सामने मेरे तुम होते हो जब, दिल बाग़-बाग़ हो जाता है । कान्हा मेरे तुम्हें देखकर, दिल की बगिया खिल उठती है । मुरझाये जो फूल प...
बुत बने रहने की आदत, अच्छी नहीं लगती मुझको । जो भी आता है बहुत कुछ, सुनाकर चला ही जाता है । प्यार हो,पूजा हो या, कोई भी तरीक़े रहे हों । कितने ही मंत्र और जंत्र, कुछ भी कराये गये क्...
बुदबुदाने की आदत, सी हो गई है मुझको । जब कभी भी ख़यालों में तुम आ जाते हो । अच्छे-अच्छों को, पागल बना के छोड़ा है । जिसको भी, जब भी, गले लगाते हो । क्या ही कबिरा,क्या ही मीरा, रैदास ...
तुम भूलते न मुझको, मैं भी ना भूल पाती । दाता तेरी ये निसबत , है भी बहुत पुरानी । कुछ तो कशिश है तुझमें, सबको वही लुभाती । तभी तो तेरे पीछे , दुनिया है दौड़ी आती । कुछ मन्नतें लिये ह...
फूलों की रंगत है पीली, छा गया बसन्त है । तन-मन मेरा सब रंग डाला, पीले रंग में आज है । चारों ओर गीतों की धुन से, हुआ तुम्हारा स्वागत है । कैसे बताऊँ मैं प्यारे दाता, ख़ुशियों की आज ...