याद आपकी-428
याद आपकी- बात आपकी
मुझको खूब सताती है
रोकर हंसना- हंसकर रोना
कुछ ऐसा हाल बनाती है
तुम तो मुझको देखा करते
मैं तो देख नहीं पाती
किससे भेजूं- कहां मैं भेजूं
तेरे लिए जो लिखी है पाती
मेरे दाता समझो अब तो
हुआ ये क्या है.. दिल का हाल
मन को मेरे- "मनहर" मेरे
फिर से कर दो मालामाल !!
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें