मदर्स डे--411
एक कहावत है बहुत पुरानी
जो बचपन से सुनता आया हूं
जीवित पिता से दंगम- दंगा
मरे पिता पहुंचाये गंगा
केवल पिता ही क्यूं
मां बाप दोनों पर ही
चरितार्थ होती है यह कहावत
मदर्स डे पर फोटो और कविताओं की
धूम मची हुई है फेसबुक वाट्सएप पर
जो कभी न याद करते हों
आज याद कर लें
अमावस्या की तरह....
जिस तरह अपने पूर्वजों को
प्रसन्न करने के लिए
अमावस्या को खीर का
भोग लगाया जाता है
कैसी विडम्बना है....
जीते जी तड़पाते रहे
अपमान के घूंट पिलाते रहे
ग़र जरूरत पड़ी तो
शोषण करने से भी नहीं चूके
मां बाप के प्रति कर्तव्य भूलकर
अधिकार जताते रहे
कहां है वो श्रवण कुमार
जो मां बाप को कंधों पर बैठाता था
आज तो तरसती हैं निगाहें मां बाप की
कि कंधा देने वाले हाथ कहां खो गए !!
@शशिसंजय
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