रिश्तों के ताने-बाने-413
रिश्तों के ताने-बाने में
तू ख़ुद को मत उलझाया कर
आया है अकेला-जाना अकेला
ख़ुद के लिए तू जीया कर
ताने-बाने जितने भी हैं
स्वार्थ के धागे बुनते हैं
केवल दाता ही तेरे हैं
बात वही सब सुनते हैं
तूने जिनको चाहा अब तक
कुछ भी वो ना लौटा पाये
दाता तेरे प्यार के बदले
सब कुछ तो तुझे देते आते
बस.. शुकराना उनका ही कर
बाकी सबके तो कर्ज़ चुका
दिल के कोने में उनको बिठा
उनकी यादों में खोया कर !!
@शशिसंजय
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