तुम हो-417


तुम हो मन का संसार मेरा
तुम ही तो मन की ख़ुशबू हो
चाहे जितना मैं फिरता रहूं
मन की दुनिया में तुम ही हो
जब भी आते हो ख्यालों में
बेवजह मुस्कुरा जाता हूं
तुम इर्द-गिर्द ही हो मेरे
ये सोच के ख़ुश हो जाता हूं
तुम चाहे जितना दूर रहो
मैं पास तुम्हें उतने पाता
भीतर में तुम हो छुप जाते
मैं इधर उधर ढूंढा करता
तेरी यादों में खोया रहता
तेरी ख़ुशबू को सूंघा करता !!
                         👣🙏

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

याद आपकी-428

दृष्टा-425

कर्म -426