कैसी प्रीत -423
कैसी प्रीत की लगन लगी है
कैसे तराने प्यार के गाऊं
जाने अंजाने जब से मिला हूं
तेरी ही छांव में पलता गया हूं
क्या-क्या मन को याद दिलाऊं
कैसे मैं शुकराना गाऊं
तू ही सब कुछ मेरा है बस
सब कुछ मुझमें तू ही है
कैसे प्यार को भूलूं तेरे
प्रीतम मेरा तू ही है
तेरे प्यार से गढ़ा गया मैं
तुझको छोड़ कहां जाऊं
दिल से दिल तक तार जुड़ा है
तुझमें विलय-विलय हो जाऊं
कैसे तराने प्यार के गाऊं
कैसे मैं शुकराना गाऊं !!
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