कर्म -426

कर्मों का लेखा-जोखा लेने
सब आपस में मिलते हैं
मात-पिता और बच्चे सारे
कर्मों से ही सबको चुनते हैं
हम कहते सब मेरा - मेरा
कोई यहां ना मेरा होता
जिसका क़र्ज़ है चुकना बाकी
वो ही केवल साथ है होता
रिश्ते - नाते प्यार के धागे
पिछले कर्मों से आये हैं
किसी से नफ़रत किसी पै गुस्सा
ये भी सब कर्मों के साये हैं
टूटे बंधन रोते हैं हम
यही तो कर्मों की माया है
मोह के बंधन तोड़ सकें तो
कोई न अपना - पराया है
सब उसकी ही माया है !!

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