लहलहाती--410
लहलहाती--410
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लहलहाती हरियाली और
झूमकर गीत गाते दरख़्तों ने
सही है पीड़ा ख़ुद भी
अपनी मां पृथ्वी के साथ
केवल वृक्ष वनस्पति ही क्यों ?
वह हमारी भी तो मां है
तभी तो....
जन्म से लेकर मृत्यु तक
हम पृथ्वी मां की....
गोद में ही चिपके रहते हैं
और वह प्यारी मां चिरकाल तक
अपने प्यार से हमें पालती-पोसती है
बड़े ही धैर्य के साथ
पर हम अभागी औलादें
उसका दिल हमेशा से
छलनी करती ही आईं हैं
हरियाली को मिटाकर
अंधाधुंध बहुमंजिली इमारतें बनाकर
ढेर सारे रसायनों का ज़हर
उसके कलेजे में डालकर
तभी तो आज उस मां ने हमें
फटकार कर....
घर पर बैठने को मजबूर कर दिया है
(कोरोनावायरस के चलते लांकडाउन)
अपनी संतानों से मिले
घावों को भरने के लिए
प्रकृति मां भी कभी कभी
ऐसे कदम उठाने को....
मजबूर हो ही जाती है
सिर्फ़ और सिर्फ़....
अपनी...
संतानों को सुधारने के लिए!!
@शशिसंजय
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