मैट्रिक में मैं दो वर्षों से फेल हो रहा था। बार बार फेल होने से मन भी अच्छी तरह न लगता था। दिल उदास रहता था। किसी काम में मन नहीं लगता था। घर से और बाहर से मुझ पर निन्दा की बौछार ...
संसार के सारे रिश्ते-नाते लेन-देन का गठरा है केवल गुरु से नाता सबका नि:स्वार्थ का रिश्ता है गुरु ही केवल हाथ पकड़ते पग-पग सबका ध्यान हैं रखते दुनिया के रिश्ते तो केवल मायाज...
इस वर्ष चालीस दिन के सवालक्ष के अनुष्ठान के पश्चात् मेरे पिता जी बवासीर (मूल व्याधि) से पीड़ित थे। नाँदुरे से भाई का पत्र आया, “पिता जी के बवासीर (मूल व्याधि) ने उग्र स्वरूप ध...
पिछली शताब्दी में स्वामी रामकृष्ण परमहंस उस स्तर की समर्थ मार्गदर्शक सत्ता हुई, जिसने शिष्यों को समय से पहले ही समाधि के लक्ष्य तक पहुँचाया। नरेंद्रनाथ दत्त स्वामी राम...
छोड़कर ये आशियाना कब कहाँ चल देंगे हम बूझता ना कुछ भी हमको कैसे सब ढूँढेंगे हम जोड़कर जो यादें औ वादे तिनके जुटाये ख़्वाब में कब बिखर जायें पता ना सोचते जो ख़याल में चुन-चु...
पूर्णिमा का चॉद है यह कार्तिक की है पूर्णिमा आज ही दुनिया में लाईं मुझको मेरी प्यारी माँ घर-परिवार औ पालन-पोषण सब कुछ तुमने दिखाया मॉ संसार से मिलने का मौका तो तुमने ही दिय...
🔶 एक बार गुरु नानक देव जी से किसी ने पूछा कि गुरु के दर्शन करने से क्या लाभ होता है? गुरु जी ने कहा कि इस रास्ते पर चला जा, जो भी सब से पहले मिले उस से पूछ लेना। वह व्यक्ति उस रास्ते ...