कार्तिक पूर्णिमा-358
पूर्णिमा का चॉद है यह
कार्तिक की है पूर्णिमा
आज ही दुनिया में लाईं
मुझको मेरी प्यारी माँ
घर-परिवार औ पालन-पोषण
सब कुछ तुमने दिखाया मॉ
संसार से मिलने का मौका तो
तुमने ही दिया था गुरुमाता
दीक्षा देकर आज के दिन ही
तुमने मुझको अपनाया था
दोनों मॉयें बड़ी प्रबल थीं
दोनों का ही प्यार मिला
गुरुमाता को अर्पित कर मुझको
दुनिया छोड़ गई तुम मॉ
कार्तिक पूर्णिमा जीवन भर मुझको
तुम दोनों की याद दिलाती है(सॉसारिक मॉ-गुरु मॉ)
तभी तो मन विचलित हो जाता
ऑखें भी भर-भर आती हैं!!
@शशिसंजय
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