संसारी रिश्ते-360

संसार के सारे रिश्ते-नाते
लेन-देन का गठरा है
केवल गुरु से नाता सबका
नि:स्वार्थ का रिश्ता है
गुरु ही केवल हाथ पकड़ते
पग-पग सबका ध्यान हैं रखते
दुनिया के रिश्ते तो केवल
मायाजाल के भ्रम हैं भरते
कोई काम नहीं आता है
जब काया छूटी जाती है
सबसे प्यारी सन्तानें ही
उस काया को आग लगातीं हैं
क्या-क्या छोड़ गये हैं वो बस
ये झगड़ा भी होता है
केवल सतगुरु हाथ पकड़कर
सबका बोझा ढोता है
केवल केवल सतगुरु ही
सबको पार लगाता है
                @शशिसंजय!!

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