छोड़कर ये आशियाना-359

छोड़कर ये आशियाना
कब कहाँ चल देंगे हम
बूझता ना कुछ भी हमको
कैसे सब ढूँढेंगे हम
जोड़कर जो यादें औ वादे
तिनके जुटाये ख़्वाब में
कब बिखर जायें पता ना
सोचते जो ख़याल में
चुन-चुन तिनके महल बनाये
खंडहर वे होते जायेंगे
प्यार से जिनको लाड़ लड़ाया
जाने वे कब छूट जायेंगे
मोह के धागों ने सबको
चुन-चुन करके तोड़ा है
भीतर बैठे भगवन ने कभी भी
मुझको न अकेला छोड़ा है
---मुझको न अभी तक छोड़ा है!!
                         @शशिसंजय

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