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क्या-क्या-381

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क्या-क्या रूप  धरे हैं तुमने मैं तो कुछ भी जानू ना कितने भेष बदलकर मिलते मैं तो कुछ भी समझूँ ना सतगुरु-मेरे दाता-मेरे प्यार तुम्हीं को करता हूँ कितने भी तुम भेष बदल लो मैं तुम पर ही मरता हूँ रिश्ते-नाते, झूठे-झगड़े सब कुछ अब तो छूट चुके हैं दिल से जितने जुड़े थे नाते वो भी अब तो दूर हटे हैं केवल तुम्हारा ऑचल मैंने कसकर अब भी पकड़ा है मुश्किल से मैं छूट सका हूँ जिन नातों ने मुझको जकड़ा है !!                       @शशिसंजय

सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-54

एक और वाकया याद आता है सुन्दर सिंह (परिवर्तित नाम) की सज़ा का। लगभग दस साल बाद पत्नी ने आत्महत्या कर ली, दो बच्चे तकरीबन आठ और नौ साल के। ससुराल बहुत अमीर तथा पहुँच वाला । अमीरी...

अमृतवाणी-188

आत्म निर्माण जीवन का प्रथम सोपान-(भाग-1) =============================== निर्माण आन्दोलन का प्रथम चरण आत्म-निर्माण है। उस दिशा में कदम बढ़ाने के लिए किसी भी स्थिति के व्यक्ति को कुछ भी कठिनाई अनुभव नहीं...

गुरुगीता-92

एक लकड़हारा जो कि जंगल से लकड़ी काट कर अपना जीवन-यापन किया करता था उसने अपने गुरु की सेवा करके एक आकर्षण मंत्र सिद्ध कर लिया था ,जिसके द्वारा वो किसी भी वस्तु को मंत्र का प्रयोग ...

दिले शायरी-75

---यही तो दिले दरिया था तेरा,    कि बच्चों की मनुहार पर,    पिछला सब कुछ भूलकर तू ,    झट से मान जाया करती थी !! ---बड़े हो जाने पर औलाद के आगे,    तुझे मजबूर होते भी देखा है,    चुप रहते हुए घ...

अमृतवाणी-187

कोई व्यक्ति जीवनभर प्राइमरी पाठशाला में ही पढ़ते रहने की जिद करे और अगले बड़े स्कूल में जाने के लिए तैयार न हो तो "उसे बाल बुद्धि ही कहा जाएगा।" "प्रेम" का प्रशिक्षण घर-परिवार ...

अद्भुत आश्चर्यजनक किन्तु सत्य-23

घटना दिसम्बर सन् 1969 की है। युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य यज्ञ कराने प्रथमतः पटना पहुँचे। इस यज्ञ में शामिल होने के लिए मेरे पिताजी श्री विजय कुमार शर्मा अपनी माता जी- मेरी ...