दिले शायरी-75

---यही तो दिले दरिया था तेरा,
   कि बच्चों की मनुहार पर,
   पिछला सब कुछ भूलकर तू ,
   झट से मान जाया करती थी !!

---बड़े हो जाने पर औलाद के आगे,
   तुझे मजबूर होते भी देखा है,
   चुप रहते हुए घुटकर ऑंसू भी,
    पी जाया करती थी!!

---तेरी निगाहों के इशारे से अक्सर
    हम सभी डरा करते थे,
    तेरे दिल में छिपा प्यार भी
    ऑखें ही बयां करती थीं!!

---जब भी कभी रोते बिलखते ,
    बच्चों को चुप कराता हूँ,
    मॉ..तू ज़ेहन में आ जाती है,
    मुझको लाड़ लड़ाते हुये!!

---जब जब भी कोई विपदा आई,
    और छूकर चली गई,
    मुझको लगता है कि मेरी माँ ,
    उसका हाथ पकड़कर ले गई !!

---क़दमों में तेरे सारा जहाँ,
    पाया है अभी तक भी मैंने,
    ऐ मॉ.. तेरे ऑचल से बड़ा ,
    कोई ऑचल भी नहीं छुपने के लिए!!
                                     @शशिसंजय

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