बच्चे(सामाजिक)-66
मुझे हँसते,खेलते,मुस्कुराते बच्चों को देखकर चिढ़ सी होती है और मैं व्यथित होकर चुपके -चुपके उन्हें रुला देता हूँ क्यों कि मेरा ऐसा अनुभव है कि जो बचपन में नहीं रो पाता है वह शेष जीवन में रोता ही रहता है उन बच्चों को रुलाकर मुझे असीम ख़ुशी होती है और मैं अपने आपको गौरवान्वित महसूस करता हूँ इसीलिये कि मैं उन्हें शेष सारे जीवन में रोने से बचा रहा हूँ 💔💔🖤💔💔 11/1/75