संदेश

बच्चे(सामाजिक)-66

मुझे हँसते,खेलते,मुस्कुराते  बच्चों को देखकर चिढ़ सी होती है और मैं व्यथित होकर  चुपके -चुपके उन्हें रुला देता हूँ क्यों कि मेरा ऐसा अनुभव है कि जो बचपन में  नहीं रो पाता है वह शेष जीवन में  रोता ही रहता है  उन बच्चों को रुलाकर मुझे असीम ख़ुशी होती है और मैं अपने आपको गौरवान्वित महसूस करता हूँ इसीलिये कि मैं उन्हें शेष सारे जीवन में  रोने से बचा रहा हूँ           💔💔🖤💔💔                 11/1/75

दुनिया(सामाजिक)-67

दुनिया की इस भाग-दौड़ में  रिश्तों का कोई मोल नहीं मतलब के होते हैं रिश्ते दिल से उनका कोई तोल नहीं जब भी ज़रूरत पड़ती है तब उठकर आ जाते हैं ये काम निकल जाते ही फिर से पीठ दिखा जाते हैं ये दिल और मन से दूर ही रखना ऐसे थोथे रिश्तों को उन जैसे ना बन पायें तो भी दूर ही रखना इन घाघों को केवल परम गुरु से रिश्ता वो ही केवल सच्चा है बार-बार हर बार ही जुड़ना केवल ये रिश्ता ही सच्चा है              💔💔🖤💔💔

व्दन्द(सामाजिक)-68

जीवन के हर क्षेत्र में द्वन्द  द्वन्द भीतर और बाहर  द्वन्द अभिलाषाओं और  अपेक्षाओं के बीच द्वन्द लक्ष्यों  और सिध्दान्तों के बीच द्वन्द मेरे और सबके बीच  द्वन्द जीवन और मृत्यु के बीच द्वन्द सपूत और कपूत के बीच द्वन्द विचारों को प्रकट करने  और न करने के बीच द्वन्द.....द्वन्द.....और .द्वन्द....                   मात्र द्वन्द        💔💔🖤💔💔           11/1/75

झूठ सॉच(सामाजिक)-69

झूठ सॉच और तेरी मेरी से ख़ुद को बचाते जाइयेगा कितनी भी अड़चनें जो आयें सबको मिटाते जाइयेगा अन्दर की ताक़त का ज़र्रा  बाहर निकलने दीजियेगा सहम सहम कर जीने से जीवन को बचाते जाइयेगा खुलकर सच को कहने की आदत को बनाये रखियेगा चिकनी चुपड़ी बातों से बस अपने को बचाते जाइयेगा कोई रूठे और कोई छूटे दाता को मनाये रखियेगा सबके दिलों की चिंगारी को  प्यार से जलाये रखियेगा             💔💔🖤💔💔                   24/5/18

हर पल(व्यक्तिगत)-70

कुछ लोग हर पल खोने के बाद कुछ पा रहे हैं मैं हर पल पाने के बाद कुछ खो रहा हूँ वे खोकर पा रहे हैं मैं पाकर खो रहा हूँ मेरे पाने और खोने की प्रक्रिया में  आस्थायें मिट रही हैं भावनायें मर रही हैं प्यार उजड़ रहा है मन रो रहा है जो पाया था खो दिया जो पा रहा हूँ खो रहा हूँ जो पाऊँगा खो दूँगा इसलिये न कुछ पाना चाहता हूँ न खोना             💔💔🖤💔💔                    9/1/75

सोचता हूँ(व्यक्तिगत)-71

सोचता हूँ कभी कभी यदि चलते रहने का नाम ही ज़िन्दगी है......! तो रफ़्तार धीमी का नाम क्या है......! रुक जाने पर यदि ज़िन्दगी की हार है.....! तो लक्ष्य विहीन चलते रहना  क्या है.....! जब राह दिखाई ना दे कोई तो सोचता हूँ कि अपार ख़ुशियाँ क़दम चूमने  वाली हैं.......! विश्वास अडिग जब होता मन में  तब लगता है मुझको कि अब हालात बदलने वाले हैं क्या यही सच है या कुछ और.......!        💔💔🖤💔💔            14/5/18

नहीं मालूम(व्यक्तिगत)-72

अतीत की प्यारी यादें  वर्तमान के कटु अनुभव भविष्य की अनगिनत कल्पनायें कौन सुखद हैं इनमें  नहीं मालूम मुझे जानने की जिज्ञासा भी नहीं  मात्र अभिलाषा इतनी सी कि कलापूर्ण जीवन जीया जाये स्वतन्त्र,समग्र,उन्मुक्त  बिना किसी हस्तक्षेप व बन्धन के लेकिन जीवन क्या है... अतीत की प्यारी यादें  वर्तमान के अपने अनुभव भविष्य  की अनगिनत कल्पनायें या फिर कुछ और....? नहीं मालूम मुझे उत्सुकता भी नहीं  सभी कुछ मालूम करने की           💔💔🖤💔💔                 17/7/77