सोचता हूँ(व्यक्तिगत)-71

सोचता हूँ कभी कभी

यदि चलते रहने का नाम ही

ज़िन्दगी है......!

तो रफ़्तार धीमी का नाम

क्या है......!

रुक जाने पर यदि ज़िन्दगी की

हार है.....!

तो लक्ष्य विहीन चलते रहना 

क्या है.....!

जब राह दिखाई ना दे कोई

तो सोचता हूँ कि

अपार ख़ुशियाँ क़दम चूमने 

वाली हैं.......!

विश्वास अडिग जब होता मन में 

तब लगता है मुझको कि

अब हालात बदलने वाले हैं

क्या यही सच है या

कुछ और.......!

       💔💔🖤💔💔

           14/5/18



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