करीब २२- २३ साल पहले की बात है। तब मैं कॉलेज में पढ़ा करती थी। फरवरी का महीना था। मैं अपनी माँ के साथ ग्राम हर्री,जिला अनूपपुर में अन्नप्राशन संस्कार कराने गई थी। कार्यक्रम श...
यह गुफा प्रवेश है आपका। हमको ऐसा ही करना पड़ा है, जब कभी भी हमारा मन अस्त-व्यस्त हुआ है, तो गुरुदेव ने बुलाया और एक ऐसे स्थान पर रखा, जहाँ हमारे अलावा कोई नहीं था। इससे हमको अपने ब...
गुरुसत्ता की प्यारी लाड़ो ,हम सबकी प्यारी जीजी को हों ख़ूब बधाई आज के दिन, जन्मी जो गीता जयन्ती को !! तुम साल-हजारों जियो यहाँ, दुनिया में प्यार लुटाती रहो सुनती सबके मन की हो त...
--खुशियों से भरा था वो आलम, तेरे साथ जो मैंने बिताया था वो रूहानी खुशियाँ मुझको अब, कहीं नज़र नहीं आतीं !! --जो भी हूँ जैसा भी हूँ, तेरे प्यार में चलकर आया हूँ जब भी दल-दल में गि...
तेरे दर पर जो कोई आता है वो मन की मुरादें पाता है यहाँ मन ही मेरे पास नहीं कहॉ जाता है, कब आता है क्या मॉगू तुझसे मैं अब तक बिन मॉगे ही सब पाया है औक़ात में मेरे था ही नहीं वो लम्ह...
अगली बार नौ नंबर बाड़े में यज्ञ के लिए जब पहुँचे, तो देखा कि बन्दरों ने आतंक मचा रखा है। पीपल के पेड़ पर चढ़कर इतना आतंक मचा डाला कि चबूतरे की सफाई करने में सभी जुटे हुए थे, चबू...
गुरुवर जो कहते उसे पूर्णतया स्वयं के जीवन में करके दिखाते। ‘‘दूसरों के प्रति उदारता स्वयं के प्रति कठोरता’’ उनके जीवन में सतत चरितार्थ तो थी ही, किन्तु उस समय वह चरम अवस्थ...