दिले शायरी -56

--खुशियों से भरा था वो आलम, तेरे साथ जो मैंने       बिताया था
वो रूहानी खुशियाँ मुझको अब, कहीं नज़र नहीं आतीं !!

--जो भी हूँ जैसा भी हूँ, तेरे प्यार में चलकर आया हूँ
जब भी दल-दल में गिरने लगूँ, तुम प्यार से मुझको उठा लेना!!

--'तूने हाथ जो मेरा पकड़ा है, मज़बूत पकड़ ही तेरी है
जन्मों से भटकता मन मेरा, मज़बूती से पकड़े रहना!!

-'-रूहानी रिश्ता है तुझसे, तू रूह में मेरी बसता है
नख से सिर तक तू छाया है, हर बात में भी तू रहता है!!

--तेरी याद में जीता हूँ प्यारे,  तेरा प्यार ही मुझको रुलाता है
शुकराना कैसे अदा करूँ, तू खुशियों से झोली भरता है!!

--ना अपना पराया कोई यहाँ, सब पिछला चुकाने आये हैं
बस तेरा रिश्ता अजर अमर, जिससे सब खुशियाँ पाते हैं!!
                                    @शशिसंजय

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