तेरे दर पर-368
तेरे दर पर जो कोई आता है
वो मन की मुरादें पाता है
यहाँ मन ही मेरे पास नहीं
कहॉ जाता है, कब आता है
क्या मॉगू तुझसे मैं अब तक
बिन मॉगे ही सब पाया है
औक़ात में मेरे था ही नहीं
वो लम्हा तूने दिखाया है
शब्दों की माला पास नहीं
भावों का हार पहनाती हूँ
अपने अवगुण सारे साथ लिये
चरणों में शीश झुकाती हूँ
मेरे सतगुरु मुझ पै कृपा रखना
तेरा हाथ हमेशा सर पर रहे
जन्मों-जन्मों तक तन और मन
बस याद में तेरी तड़पता रहे !!
@शशिसंजय
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