संदेश

गुरुगीता-101

भारत के उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में एक योगी, सिद्ध महापुरुष एवं सन्तपुरुष थे देवरहा बाबा. डॉ॰ राजेन्द्र प्रसाद, महामना मदन मोहन मालवीय, पुरुषोत्तमदास टंडन, जैसी विभू...

गुरुगीता-100

ब्यास लंगर में जब खाना (गुरुप्रसाद )दिया जाता है तो बार-बार Annoucement की जाती है कि जितनी जरूरत हो उतना ही लिया जाए क्योंकि उस पर गुरु की दृष्टि पड़ी होती है और वैसे भी हमें अपने अन्न क...

अद्भुत आश्चर्यजनक किन्तु सत्य-30

सन् 1996 के आखिर में मेरा तबादला चाइबासा में हो गया। यहॉ आने के लिए मैं मानसिक रूप से बिलकुल तैयार नहीं था। आरंभ से ही गुरुदेव से और उनके मिशन से इस प्रकार जुड़ा रहा कि विभागीय जि...

अमृतवाणी-194

हर व्यक्ति, हर वस्तु शुद्ध आत्मा है जो पवित्र है, लिंगहीन है तथा शाश्वत शिव है। नाम, रूप और शरीर जो भौतिक है, सारी भिन्नताओं के मूल हैं। अगर तुम नाम और रूप के अंतर को हटा दो, तो सा...

देते हो-388

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देते हो हर पल ही सबको एहसास न होने देते हो दुनिया देती जब भी किसी को सुना-सुना कर देती है मनहर हो तुम मेरे प्यारे मन हर कर भी चुप रहते हो एक छलावन प्यार हमारा जो दिखा-दिखा कर करते हैं कुछ ना सीख सके हम तुमसे शरण में रह कर भी अब तक थोड़ी सी सत्ता मिल जाए अंहकार रहता है तब तक मिलने का ढंग-बोलने का ढंग सब कुछ बदल-बदल जाता है तुमने प्यार दिया कितनों को वह भी प्यार न दे पाता है रंग-ढंग सब ही बदल जाता है तेरा दिया भी भूल जाता है !!                                                   @शशिसंजय

दिले शायरी-81

---रगड़-रगड़ कर माथा तेरे,      चरणों को छूता हूँ मैं,      सतगुरु कैसे कर्ज़ चुकाऊँ,      सज़दे में झुकता हूँ मैं!! ---मात-पिता तुम ही हो मेरे,       सारे रिश्ते तुम्हीं से हैं       ब...

गुरुगीता-99

एक संत के पास 30 सेवक रहते थे एक सेवक ने गुरुजी के आगे अरदास की महाराज जी मेरी बहन की शादी है तो आज एक महीना रह गया है तो मैं दस दिन के लिए वहां जाऊंगा कृपा करें आप भी साथ चले तो अच्छ...