गुरुगीता-99

एक संत के पास 30 सेवक रहते थे एक सेवक ने गुरुजी के आगे अरदास की महाराज जी मेरी बहन की शादी है तो आज एक महीना रह गया है तो मैं दस दिन के लिए वहां जाऊंगा कृपा करें आप भी साथ चले तो अच्छी बात है गुरु जी ने कहा बेटा देखो टाइम बताएगा नहीं तो तेरे को तो हम जानें ही देंगे उस सेवक ने बीच-बीच में इशारा गुरु जी की तरफ किया कि गुरुजी कुछ ना कुछ मेरी मदद कर दे आखिर वह दिन नजदीक आ गया सेवक ने कहा गुरु जी कल सुबह जाऊंगा मैं गुरु जी ने कहा ठीक है बेटा सुबह हो गई जब सेवक जाने लगा तो गुरु जी ने उसे 5 किलो अनार दिए और कहा ले जा बेटा भगवान तेरी बहन की शादी खूब धूमधाम से करें, दुनिया याद करे कि ऐसी शादी तो हमने कभी देखी ही नहीं और साथ में दो सेवक भेज दिये जाओ तुम शादी पूरी करके आ जाना। जब सेवक घर से निकले 100 किलोमीटर गए तो मन में आया जिसकी बहन की शादी थी वह सेवक से बोला गुरु जी को पता ही था कि मेरी बहन की शादी है और हमारे पास कुछ भी नहीं है फिर भी गुरु जी ने मेरी मदद नहीं की। दो-तीन दिन के बाद वह अपने घर पहुंच गया, उसका घर राजस्थान के रेतीले इलाके में था, वहां कोई फसल नहीं होती थी वहां के राजा की लड़की बीमार हो गई, वैद्य जी  ने बताया इस लड़की को अनार के साथ यह दवाई दी जाएगी तो यह लड़की ठीक हो जाएगी। राजा ने मुनादी करवा रखी थी अगर किसी के पास अनार है तो राजाजी उसे बहुत ही इनाम देंगे, इधर मुनादी वाले ने आवाज लगाई कि अगर किसी के पास अनार है तो राजा को जरूरत है, जल्दी आ जाओ जब यह आवाज उन सेवकों के कानों में पड़ी, वह सेवक उस मुनादी वाले के पास गए हमारे पास अनार है चलो राजा जी के पास,राजाजी को अनार दिए गए अनार का जूस निकाला गया लड़की को दवाई दी गई लड़की ठीक-ठाक हो गई। राजा जी ने पूछा तुम कहां से आए हो ? तो उसने सारी हकीकत बता दी। राजा ने कहा ठीक है  तुम्हारी बहन की शादी मैं करूंगा राजा जी ने हुकुम दिया कि - ऐसी शादी होनी चाहिए कि लोग यह कहे कि यह राजा की लड़की की शादी है सब बारातियों को सोने चांदी गहने के उपहार दिए गए। बरात की सेवा बहुत अच्छी हुई लड़की को बहुत सारा धन दिया गया लड़की के मां-बाप को बहुत ही जमीन जायदाद आलीशान मकान बहुत ही पैसे रुपए दिए गए। लड़की भी राजी खुशी विदा होकर चली गई, अब सेवक सोच रहे हैं कि- गुरु की महिमा गुरु ही जाने हम ना जाने क्या-क्या सोच रहे थे गुरु जी के बारे में, गुरु जी के वचन थे जा बेटा तेरी बहन की शादी ऐसी होगी दुनिया देखेगी।
गुरु के वचन के अंदर ताकत होती है लेकिन हम नहीं समझते जो भी वह वचन निकालते हैं वह सिद्ध हो जाता है हमें गुरु के वचनों के ऊपर अमल करना चाहिए और विश्वास करना चाहिए कि ना जाने संत मौज में आकर क्या दे दें रंक से राजा बना दे ।
गुरुगीता पाठ:
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गुरुसेवा परं तीर्थमन्यत्तीर्थमनर्थकम्।
सर्वतीर्थाश्रयं देवि सदगुरोश्चरणाम्बुजम्।।105।।
अर्थ:
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हे देवि  ! गुरुसेवा श्रेष्ठ तीर्थ है, अन्य तीर्थ वृथा हैं। सगुण निर्गुण ब्रह्मविद गुरु का चरण कमल सब तीर्थों का आश्रय स्वरूप है ।।105।।
105.
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Oh, Devi service to the Master is the best holy place.The other holy place are useless. The support and base of all the only places are the lotus feet of the Master, who has realised the Brahma with attributes and without attributes. It means that all the holy places find refuse at the lotus feet of the Master.
                          👣🙏

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