दिले शायरी-81
---रगड़-रगड़ कर माथा तेरे,
चरणों को छूता हूँ मैं,
सतगुरु कैसे कर्ज़ चुकाऊँ,
सज़दे में झुकता हूँ मैं!!
---मात-पिता तुम ही हो मेरे,
सारे रिश्ते तुम्हीं से हैं
बाक़ी सब तो दुनियादारी,
दिल के तार जुड़े तुमसे हैं!!
---ऊँगली पकड़ रखी है मेरी,
मन को अब भी थाम रखा है,
चँचल बालक हूँ मैं अब तक,
ऐसा तुमने जान रखा है!!
---गुरु पूनौ के दिन ही तुमने,
एक अलौकिक दृश्य दिखाया,
कब से जुड़ा रहा हूँ तुमसे,
कुछ ऐसा ही आभास कराया!!
---सतगुरु तुमने शरण में लेकर,
नैया मेरी पार लगा दी,
जनम-जनम से भटकता आया,
तुमने अच्छी राह दिखा दी!!
@शशिसंजय
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