सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-6

अनवरत कार्यक्रमों की श्रंखला में नवरात्रि साधना का समय भी आ गया, कितने लोगलघुअनुष्ठान(24000गायत्री मंत्र जप) करेंगे,सबको बिठाकर तय किया गया।ज्यादातर लोग घबराने लगे कि नौ दिन में इतना जप कैसे होगा । उन लोगों की घबराहट देखकर, सबसे अलग- अलग पूछकर कि कौन
कितनी माला करेगा । किसी ने 1 माला किसी ने 2 माला इस तरह आख़िरी बन्दी ने 11 माला कुल 40 बन्दी साधना के लिए तैयार हुये । अधीक्षक महोदय ने जब सुना तो बहुत खुश हुये और बोले एक अलग बैरक की व्यवस्था कर देते हैं साधकों के लिए । और उन्होंने वैसा ही किया । सुबह 8 बजे से शाम 6बजे तक हम लोग वहीं रुकने लगे,सुबह 6 बजे बैरक खुलती तथा शाम 6 बजे सभी की हाज़िरी होकर बैरकें बन्द हो जाती थीं । दिनचर्या में सुबह आरती, ध्यान, यज्ञ,फिर प्रज्ञा पेय उसके बाद थोड़ा आराम । दोपहर में ज्योतिअवतरण साधना, फ़िर वीडियो पर गुरुदेव माताजी का प्रवचन, 1 घन्टा जप, शाम की आरती और अन्त में नादयोग साधना।जेल परिसर से बाहर निकलते-निकलते शाम के 7 बज जाते थे । प्रशासन की तरफ़ से फलों की
व्यवस्था की जाती थी साधकों के लिए । कुल मिलाकर अच्छा लग रहा था उन्हें भी और हमें भी । सभी में बहुत उत्साह था । 1/2 बच्चे तो केवल 2 लोंग पर ही रह रहे थे, एकाध केवल  पानी पर । बहुत समझाया लेकिन नहीं माने,
हारकर गुरुदेव पर छोड़ दिया ।
4_5 दिन ही हुये थे साधना चलते कि अचानक 2 बन्दियों में आपस में लड़ाई होने लगी,कि बता दूँ क्या दीदी को ? बोल बताऊँ क्या  ? आखिरकार मैंने ही पूँछा कि क्या बात है, तो मालूम पड़ा कि रामलाल (परिवर्तित नाम) माला तो कर रहा है लेकिन पेशाब के बहाने जब  पूछकर बैरक से बाहर जाता है तो रोटियाँ छुपाकर रख आता है और रात में
छुपकर खाता है । और प्रशासन से आने वाले केले भी ले
लेता है । हँस-हँस कर बुरा हाल था हमारा । सभी को शांति से समझा- बुझाकर शांत किया । उससे भूखा नहीं रहा जाता था लेकिन खाने का बताने पर उसे केले भी नहीं मिलते और साधकों की बैरक से भी निकलना पड़ता, अतः
सबको समझाना पड़ा ।
इस तरह नवरात्रि साधना शान्तिपूर्ण ढ॔ग से सम्पन्न हुई ।
आख़िरी दिन पूर्णाहुति कराई गई । प्रशासन के सदस्य भी
सम्मिलित हुये । इस तरह गुरुदेव माताजी शांतिकुंज के
साथ-साथ यहाँ भी बीजारोपण कर रहे थे गायत्री मंत्र की
साधना और यज्ञ का ।
                                    क्रमशः!
                              "गुरुकॄपा केवलम्"
                          "गुरुवर शरणम् गच्छामि"
                                     👣🙏

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