सलाखों के अन्दर गायत्री साधना-1

सेन्ट्रल जेल में बंद श्री नेतराम फौजी (परिवर्तित नाम) हमेशा ये बहस किया करता था कि यज्ञ के बाद आप गायत्री माता को देवमाता कैसे कहते हो?(या कुण सी माता,कसी माता आगी)ये कौन सी माता है ? सन्तोषी माता,दुर्गा माता,लक्ष्मी माता तो सुनी है गायत्री माता कहॉं से आ गई ? लगातार बहस के बाद यज्ञ भी करता था।दिन-रात रोना, गायत्री जप करना,यज्ञ करना,रात्रि में बैरक बन्द हो जाने के बाद सिर को दीवार में मारकर रोना।क्यों कि सचमुच में उसने गंभीर अपराध किया था,इसीलिये पश्चातापवश उसकी ये हालत थी।जब अन्य बंदियों ने बताया कि ये रातभर परेशान करता है सभी को ।तो हमने उसे समझाया कि रोने से अच्छा है कि ऑख बन्द करके बैठकर जप किया कर।तुझे विश्वास नहीं है लेकिन हमें भरोसा है कि गुरुदेव जरूर सहायता करेंगे ।उसने कहना माना और लगातार 5_6माह तक जप-ध्यान करता रहा ।एक दिन अचानक नवरात्रि साधना के दिनों में मुझे हाथ पकड़कर बैरक में ले गया और रोने लगा,ऑंखें देखकर लग रहा था कि रातभर सोया नहीं है--बहुत देर तक प्यार से सिर पर हाथ फेरती रही और पूछती रही ।शान्त होने पर जो उसने बताया वह अक्षरशः बता रही हूँ ।उसने कहा कि रातभर ध्यान में रहा और देखता क्या हूँ कि सारे देवता लाइन में खड़े हैं हाथों में फ़ूल माला लेकर।(बता दें कि जेल में लगभग  24 वर्ष पूर्व गायत्री मंदिर बना है जिसमें गुरुदेव-माताजी और गायत्री माता की मूर्ति लगी हैं तथा उसी परिसर में शिव मंदिर व पीपल का पेड़ जिनकी आयु का किसी को भी अन्दाजा नहीं है,स्थित हैं) सारे देवता लाइन से गायत्री माता को फ़ूल माला पहनाकर प्रणाम करके निकलते जा रहे हैं अन्त में एक सन्यासी सफ़ेद वस्त्र धारण किये पीपल के पेड़ के पत्तों की माला बनाकर गायत्री माता को पहनाते हैं और मुझसे बोले कि शक करता है  ? ये सब देवों की मॉ हैं  ? बोल क्या चाहता है  ? फौजी ने उनसे कहा मुझे बाहर जाना है, उन्होंने जबाब दिया कि गायत्री जपता रह दो माह में माताजी निकाल देंगी । सचमुच ऐसा ही हुआ ।
                              "गुरुकॄपा केवलम्"
                          "गुरुवर शरणम् गच्छामि"
                                         👣🙏

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