श्राद्धपक्ष-394

जिन्दगी भर साथ थे जो
नींव की गहराई तक
भावनाओं के भवन पर
बैठे हैं हम जो आज तक
ऐसे हमारे पूर्वजों को
श्रद्धा सुमन अर्पित करें
उनके किये उपकार को हम
श्राद्ध-तर्पण से पूरा करें
श्राद्ध श्रद्धा से करेंगे
ख़ुश होंगे हमारे पितर
खुशियों से भर देंगे आंगन
दुःख होंगे सब तितर- बितर !
सभी पितरों को सादर नमन !!
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