ना कोई चाहत--399
ना कोई चाहत है ना कोई इच्छा
मिलूं तुममें जाकर कुछ ऐसी है स्वेच्छा
न संसार मेरा न दुनिया की हूं मैं
तू है मेरे अन्दर और बाहर भी तू है
ये विश्वास मेरा प्रबल होता जाये
तेरी रूह में मेरा कण कण समाये
ऐसे मिलन हो हमारा तुम्हारा
चारों ओर तुम ही.. हो ऐसा नज़ारा
ढूंढ़े कोई मुझको मैं मिल ही ना पाऊं
तन और मन से मैं तुझमें समा जाऊं
कुछ ऐसी मेहर मुझ पै कर दो तुम प्यारे
कि मुझको दिखें सिर्फ़ तेरे नज़ारे
@शशिसंजय
,7/3/2020
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