दूर होकर भी--404
दूर होकर भी हमेशा ही
पास होने का एहसास करा जाते हो
बिन बोले बिना देखे ही
मेरे घावों पै मरहम लगा जाते हो
भ्रम की घड़ियों के अधर में सोचता हूं कि
तुम नहीं हो मेरे आस पास
उसी क्षण अपनी मौजूदगी
महसूस करा जाते हो
फ़िर भी मैं ढूंढता हूं हमेशा
दोस्त और दुनिया में सहारा
और एक तुम हो....
जो सदा ही बिना जताये
दिये ही चले जाते हो
मैं अगर कुछ भी किसी को
दे जाता हूं जरुरत के समय
तो सुनाता भी बहुत हूं
तुम देकर भी हर वक्त
मुस्कराये ही चले जाते हो
हर छोटे-बड़े गुनाहों को मेरे
हमेशा ही माफ़ किया है तुमने
कुछ ऐसा ही कर सकूं मैं भी
किसी भी तरह....
मुझको भी तो ये हुनर
सिखाया होता तुमने !!
@शशिसंजय
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