अन्तर का उल्लास--401

अन्तर का उल्लास यहां पर
अन्दर ही सब खुशियां हैं
बाहर के आडम्बर से अच्छी
अपने भीतर की ये दुनिया है
ना कोई रिश्ता ना कोई बन्धन
ना ही कोई दुनियादारी है
अन्तर में तेरे संग होते ही
मिल जाती खुशियां सारी हैं
केवल तू ही तू दिखता है
चारों तरफ ही ख़ुशबू है
तेरी आभा के घेरे में बस
तन मन सब भीगा बुद्धू है
बुद्धू बनकर रहना आना
इसमें ही तो मस्ती है
बिन दीखे तू खेल दिखाता
कुछ ऐसी तेरी हस्ती है !!
                  @शशिसंजय
                      10/3/2020

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