संदेश

मैंने भी सुना है(आध्यात्मिक)-158

मैंने भी सुना है न जाने,                    किसने ख़बर फैलाई है । तुझसे मिलना मेरा अब तक,                    बेन्तहा मेरी ही रुसवाई है । --क्या  फ़र्क़ पड़ता है मुझको,                    खो जाने दो उसकी बाँहों में । ये जन्नत भी जहाँ में,                    किसी किसी ने ही पाई है । --जिसका नज़रिया जैसा होगा,                        वो वैसे ही कह पायेगा । पेड़ लगाया है बबूल का,                 ख़ुशबू गुलाब की कैसे पायेगा । --ज़माने ने भला सदियों से,                   आज तक किसी को छोड़ा है । दर्द जिसने पाया है अभी तक,                     वो ही तो निखर के आया है ।          ...

ऑखिन देखी(सामाजिक)-159

दिन रात लगी रहती सेवा मे  फिर भी सासू जी ख़ुश ना हैं  रोज़ रोज़ की चिक चिक से  वो हरदम ही रोया करती है   समझ नहीं आता है उसको  कहॉ जाये वो क्या तो करे  मॉ और बाप नहीं दुनिया में   जिनसे वो मन की व्यथा कहे  फैल गया ठोकर से दूध तो  बहू पर लगी चिल्लाने सासू  अँधी है क्या ?दिखता नहीं है  तेरे बाप के घर का है क्या ?  बहू बेचारी चुप थी क्या बोले? इसी तरह कुछ दिन फिर बीते एक दिन सास की ठोकर से घी का डिब्बा बिखरा जमी पर अब भी सासू उस पर चिल्लाई अँधी है क्या ? पता नहीं है ? डिब्बा यहॉ पर रखते हैं क्या ? ख़र्चा कैसे चलता है ?  तुझे पता क्या ?  कब तक ऐसा होता रहेगा  समझ नहीं आता है मुझको  कहीं बहू पर सास है भारी  कहीं बहू का पलड़ा भारी        💔💔🖤💔💔

आ भी जाओ(आध्यात्मिक)-160

आ भी जाओ अब तुम कुछ और ना बताया करो बहाने तरह तरह के तुम कुछ और ना बनाया करो --आ जाने से तुम्हारे ये दिल मचल सा उठता है   प्यार की हिलोरें वो बार बार ले उठता है --तुम कैसे समझोगे बिछड़न की इस तड़पन को   कैसे बताऊँ फिर से मैं अपनी ही इस भटकन को  --कहती हूँ कितनी बार तुम आते रहा करो यूँ ही   लगती विरह की आग को आकर मिटाओ तुम ही                                👣🙏🏻

सुख आते ही(सामाजिक)-161

सुख आते ही बौरा जाने की,                       आदत हमारी हो गई । दुख आते ही घबरा जाने की,                       फ़ितरत हमारी हो गई । --सुख की पहचान को अक्सर,                       हम धन से जोड़ा करते हैं । तुमसे जुड़ने वाले धन पर,                       ध्यान नहीं हम दे पाते हैं । --हारी-बीमारी-ग़रीबी को,                       हम दुख से जोड़ा करते हैं । तुमसे छूटने की बीमारी को,                        हम दुख ना समझा करते हैं । --तेरी प्रार्थना ,तेरी याद में ,                         जो हर पल जीया करते हैं । वही धनी हैं सबसे ज़्यादा जो,                   सब...

जन्मदिन(आध्यात्मिक)-162

सन्तों का संसार यहॉ पर, सन्तों की यहॉ सन्तानें हैं । जन्म जिन्होंने दिया जिन्हें भी, (गुरुदेव माताजी से आहुति व छुटकी तक) सब पर सन्त कृपा ही है । गीता जयन्ती पर ख़ुद है जन्मी, रामनवमी पर पुत्र हैं जन्मे, ऐसी जीजी अन्नपूर्णा हमारी, जिन्होंने चिन्मय भइया जन्मे । रूपचतुर्दशी पर जन्म है जिनका, ऐसे (भाईसाहब हमारे)पिता है न्यारे । मात-पिता दोनों के प्यारे, चिरँजीव चिन्मय सदा दुलारे । महाकाल-महाकाली के वँशज, जो दुनिया को राह दिखाते हैं । सन्तों की वँश परम्परा बढ़ाने, हर पीढ़ी में सन्त ही आते हैं ।  (चिन्मय भइया के जन्मदिन पर)              👣🙏🏻

जितनी गाथा कहूँ तुम्हारी(आध्यात्मिक)-163

जितनी गाथा कहूँ तुम्हारी,                    उतनी ही बढ़ती जाती है । साथ तुम्हारा,बात तुम्हारी,                     सब कुछ याद दिलाती है । --नख से सिर तक ध्यान तुम्हारा,                          हरदम बना ही रहता है ।    चरणों के चरणामृत का मुझको,                        स्वाद बना ही रहता है । --तिलक लगाना फूल चढ़ाना,              चरणों में फिर सिर को झुकाना । सामने बैठे हो तुम मेरे,               उस पल की क्या बातें बताना । --स्वर्ग का मुझको पता नहीं है,              मरने के बाद ही मिलता होगा । जीते जी का स्वर्ग मिला है,               सबको जो ना मिलता होगा ।                  ...

सागर के बीचों बीच(सामाजिक)-164

सागर के बीचों-बीच से छुपकर सूरज जब घर को लौट जाता है दुनिया उसको देखने दौड़ी आती  सनसैट (sunset) वो कहलाता है दृश्य सुहाना हो जाता है...... जल में वो डूबता दिखता है लाल रश्मियाँ देकर जल को सुन्दरता बिखराता जाता है थककर चूर जब हम हो जाते  मुँह लटकाये घर आया करते हैं नया प्रकाश,नई प्रेरणा,नई वो ताक़त  क्यों सूरज से हम ना ले पाते हैं अन्दर का सूरज बुझ ना पाये हम सब यही प्रार्थना करते हैं प्रेरणा पुन्ज बने यह सूरज जो सबको उर्जा से भरते हैं                 👣🙏🏻