मैंने भी सुना है(आध्यात्मिक)-158
मैंने भी सुना है न जाने, किसने ख़बर फैलाई है । तुझसे मिलना मेरा अब तक, बेन्तहा मेरी ही रुसवाई है । --क्या फ़र्क़ पड़ता है मुझको, खो जाने दो उसकी बाँहों में । ये जन्नत भी जहाँ में, किसी किसी ने ही पाई है । --जिसका नज़रिया जैसा होगा, वो वैसे ही कह पायेगा । पेड़ लगाया है बबूल का, ख़ुशबू गुलाब की कैसे पायेगा । --ज़माने ने भला सदियों से, आज तक किसी को छोड़ा है । दर्द जिसने पाया है अभी तक, वो ही तो निखर के आया है । ...