सुख आते ही(सामाजिक)-161
सुख आते ही बौरा जाने की,
आदत हमारी हो गई ।
दुख आते ही घबरा जाने की,
फ़ितरत हमारी हो गई ।
--सुख की पहचान को अक्सर,
हम धन से जोड़ा करते हैं ।
तुमसे जुड़ने वाले धन पर,
ध्यान नहीं हम दे पाते हैं ।
--हारी-बीमारी-ग़रीबी को,
हम दुख से जोड़ा करते हैं ।
तुमसे छूटने की बीमारी को,
हम दुख ना समझा करते हैं ।
--तेरी प्रार्थना ,तेरी याद में ,
जो हर पल जीया करते हैं ।
वही धनी हैं सबसे ज़्यादा जो,
सबकी ख़ुशहाली मॉगा करते हैं ।
👣🙏🏻
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